एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि अलीगंज स्थित तीन मंजिला इमारत में निर्माण नियमों का उल्लंघन किया गया था। इसी वजह से भवन मालिक को दोबारा ध्वस्तीकरण नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद इमारत को गिराने की कार्रवाई की जाएगी।
2016 में भी हुआ था ध्वस्तीकरण का आदेश
जांच में सामने आया है कि वर्ष 2016 में इस भवन को अवैध निर्माण के चलते गिराने का आदेश जारी किया गया था। हालांकि, दो महीने के भीतर ही यह आदेश वापस ले लिया गया और भवन का संचालन जारी रहा। अब इस पूरे प्रकरण में उस समय से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
एलडीए उपाध्यक्ष ने कहा कि जिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण यह अवैध निर्माण वर्षों तक संचालित होता रहा, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। संबंधित अधिकारियों की पहचान कर उनकी जिम्मेदारी तय की जा रही है।
अग्निकांड में 15 लोगों की गई जान
सोमवार दोपहर अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित ऊषा मेहता मार्ग पर बनी इस इमारत में भीषण आग लग गई थी। भवन में एक एनिमेशन सेंटर और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं। हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जिनमें अधिकांश छात्र बताए जा रहे हैं। वहीं, नौ अन्य लोग घायल हुए हैं, जिनका इलाज जारी है।
चार आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में भवन से जुड़े रामकृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, तुषार कृष्ण जायसवाल और सुरेश कुमार साहू शामिल हैं। इनके खिलाफ गैर-इरादतन हत्या समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
इसके अलावा बिजली विभाग, अग्निशमन विभाग और लखनऊ विकास प्राधिकरण के चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
SIT करेगी पूरे मामले की जांच
उत्तर प्रदेश सरकार ने हादसे की गहन जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। इस टीम में अपर मुख्य सचिव (पर्यटन) अमृत अभिजात और एडीजी लखनऊ जोन प्रवीण तिवारी को शामिल किया गया है।
एसआईटी हादसे के कारणों, सुरक्षा मानकों में हुई चूक, प्रशासनिक लापरवाही और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की जांच करेगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस दर्दनाक हादसे के बाद प्रदेशभर में अवैध व्यावसायिक भवनों और कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन ने ऐसे संस्थानों की व्यापक जांच शुरू करने के संकेत दिए हैं।









