IMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कानपुर से शुरू हुए ‘आई लव मोहम्मद’ विवाद पर बड़ा बयान दिया है। ओवैसी ने कहा कि अगर किसी नेता के लिए ‘आई लव’ पोस्टर लगाना कानून के हिसाब से ठीक है, तो पैगंबर मोहम्मद के लिए यह क्यों गलत माना जा रहा है।
टीवी9 भारतवर्ष से बातचीत में ओवैसी ने कहा, “लोग प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर पोस्टर निकालते हैं, किसी को कोई तकलीफ नहीं होती। अगर हम अपनी आस्था के नाम पर ऐसा करते हैं, जिसमें हिंसा या नफरत का कोई संदेश नहीं है, तो यह बिल्कुल सही है।”
अपने ईमान का हिस्सा बताया
ओवैसी ने कहा, “हम मुसलमान हैं और पैगंबर मोहम्मद ने हमें सिखाया कि उन्हें सारी दुनिया की चीजों से ज्यादा चाहो। यह मेरे ईमान का हिस्सा है। अगर किसी ने आई लव मोदी लिखा तो वह अलाउड है, अगर किसी अन्य नेता के लिए लिखा जाए तो ठीक है। तो पैगंबर के नाम पर ‘लव’ लिखने में क्या गलत है?”
विवाद की शुरुआत और फैलाव
यह विवाद 4 सितंबर को उत्तर प्रदेश के कानपुर में शुरू हुआ था। रावतपुर इलाके में बारावफात के जुलूस के दौरान ‘आई लव मोहम्मद’ लाइट बोर्ड लगाया गया, जो पैगंबर मुहम्मद के जन्म का प्रतीक है।
इसके जवाब में ‘आई लव महादेव’ अभियान भी उत्तर प्रदेश के कई शहरों में शुरू हुआ और धीरे-धीरे यह उत्तराखंड, तेलंगाना और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में फैल गया। इन राज्यों में इस अभियान के समर्थन और विरोध में अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
ओवैसी के अनुसार, यह मामला केवल आस्था और सम्मान का है, और इसमें किसी प्रकार की हिंसा या नफरत शामिल नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून के हिसाब से ऐसे पोस्टर बिल्कुल जायज हैं।









