वाराणसी। छठ महापर्व के तीसरे दिन सोमवार को वाराणसी के घाटों पर भक्ति और आस्था का अद्भुत नज़ारा देखने को मिला। गंगा की पवित्र धारा में खड़े होकर लाखों श्रद्धालुओं ने डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। वातावरण “छठी मैया” के गीतों और श्रद्धा की लहरों से गूंज उठा।
गंगा तटों पर पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाएं पूजा सामग्री के साथ कतारों में खड़ी थीं। उनके चेहरों पर व्रत की कठिनाई के बावजूद अपार संतोष और भक्ति की झलक थी। चारों ओर “अभी ना डुबिहे भास्कर दीनानाथ, करिहे घरवा उजियार हो” जैसे भक्ति गीतों की गूंज माहौल को और भी पवित्र बना रही थी।
छठ पर्व के इस पवित्र दिन पर श्रद्धालुओं ने सूर्य देव को नमस्कार करते हुए जल अर्पण किया और यह कामना की कि अगली सुबह भगवान भास्कर नई ऊर्जा और रोशनी के साथ उनके जीवन को उज्जवल बनाएं।
छठ पर्व की विशेषता यही है कि इसमें न केवल उगते सूर्य को बल्कि डूबते हुए सूर्य को भी अर्घ्य दिया जाता है, यह परंपरा न केवल आस्था बल्कि समभाव और कृतज्ञता का प्रतीक है।










