कंगना रनौत की बढ़ी मुश्किलें, इस मामले में चलेगा राष्ट्रदोह का केस

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आगरा : बॉलीवुड अभिनेत्री और हिमाचल प्रदेश के मंडी से बीजेपी सांसद कंगना रनौत एक बार फिर विवादों में हैं। आगरा की स्पेशल MP-MLA कोर्ट ने उनके खिलाफ किसानों के अपमान और राष्ट्रद्रोह के मामले में सुनवाई के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने बुधवार को हुई सुनवाई में रिवीजन याचिका स्वीकार करते हुए कंगना के खिलाफ केस दोबारा शुरू करने के निर्देश दिए।

इससे पहले निचली अदालत ने यह केस खारिज कर दिया था, लेकिन अब वही अदालत दोबारा इस मामले की सुनवाई करेगी। बता दें, 10 नवंबर को अदालत ने कंगना के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। कोर्ट ने अब साफ किया है कि अभिनेत्री पर बीएनएस की धारा 356 और 152 के तहत मुकदमा चलेगा।

कौन-सी धाराओं में चलेगा केस

  • धारा 356: किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाले बयान या कार्यों से जुड़ी है। इसमें दोषी पाए जाने पर दो साल की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

  • धारा 152: भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने से संबंधित है। इसमें 7 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है।

किसानों पर टिप्पणी को लेकर हुआ विवाद

यह मामला 26 अगस्त 2024 के एक इंटरव्यू से जुड़ा है, जिसमें कंगना ने कहा था कि “किसान आंदोलन के दौरान रेप और मर्डर हुए थे, अगर बिल वापस नहीं होता तो आंदोलन और लंबा चलता।” इस बयान के बाद आगरा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट रमाशंकर शर्मा ने 11 सितंबर 2024 को MP/MLA कोर्ट में याचिका दायर की थी।

रमाशंकर शर्मा का कहना है कि वे खुद किसान परिवार से हैं और कंगना की इस टिप्पणी से देशभर के किसानों की भावनाएं आहत हुईं। उन्होंने पहले पुलिस कमिश्नर और थाना न्यू आगरा को भी शिकायत भेजी थी।

किसानों और गांधी पर भी दिए विवादित बयान

कंगना पर यह आरोप भी है कि उन्होंने महात्मा गांधी के प्रति भी अपमानजनक टिप्पणी की थी। 7 नवंबर 2021 को दिए बयान में उन्होंने कहा था कि “गाल पर चाटा खाने के बाद भीख मिलती है, आजादी नहीं। 1947 की आजादी हमें भीख में मिली थी, असली आजादी 2014 में मोदी सरकार आने के बाद मिली।” उनके इस बयान की उस वक्त भी तीखी आलोचना हुई थी।

किसान आंदोलन को बताया था खालिस्तानी साजिश

कंगना रनौत ने किसान आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया पर कई बार आंदोलनकारियों को खालिस्तानी आतंकवादी बताया था। उन्होंने लिखा था, खालिस्तानी आतंकवादी सरकार पर दबाव बना रहे हैं, लेकिन हमें इंदिरा गांधी को नहीं भूलना चाहिए, जिन्होंने इन्हें अपनी जूती के नीचे कुचल दिया था।”

इसके अलावा उन्होंने 27 नवंबर 2020 को एक पोस्ट में किसान आंदोलन में बैठी एक बुजुर्ग महिला को शाहीन बाग की “बिलकिस दादी” बताते हुए लिखा था कि वह “100 रुपए लेकर धरने पर बैठती हैं।”

जब CISF कॉन्स्टेबल ने जड़ा था थप्पड़

कंगना के इन्हीं बयानों को लेकर साल 2024 में चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर CISF की महिला कॉन्स्टेबल कुलविंदर कौर ने उन्हें थप्पड़ मार दिया था। कौर का कहना था कि किसान आंदोलन में बैठी उनकी मां का भी कंगना ने अपमान किया था। बाद में कॉन्स्टेबल को हिरासत में लेकर सस्पेंड कर दिया गया था।

कोर्ट में अब तक पेश नहीं हुईं कंगना

कंगना रनौत को अब तक इस मामले में छह बार समन जारी किए जा चुके हैं, लेकिन वह एक बार भी कोर्ट में पेश नहीं हुईं। अब अदालत के आदेश के बाद उनके खिलाफ देशद्रोह और किसानों के अपमान के मामले में ट्रायल चलेगा। अदालत ने कहा है कि यह मामला केवल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का नहीं, बल्कि समाज के एक बड़े वर्ग की गरिमा और देश की एकता से जुड़ा मामला है।

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Author: News Rastra

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