लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के चौथे और अंतिम दिन बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सदन में विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए अपनी सरकार की उपलब्धियों का विस्तार से जिक्र किया। इस दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी पर जमकर हमला बोला और कानून-व्यवस्था, विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं को लेकर पिछली सरकारों को कटघरे में खड़ा किया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी सरकार ने उत्तर प्रदेश को ‘बीमारू राज्यों’ की श्रेणी से बाहर निकालने का काम किया है। उन्होंने दावा किया कि आज प्रदेश में व्यापारियों से गुंडा टैक्स नहीं वसूला जाता और कानून का राज स्थापित हुआ है। सीएम ने कहा, “आज अगर कोई बेटी से छेड़छाड़ करने की हिम्मत करता है, तो उसे पता है कि कार्रवाई तय है। प्रदेश में माफिया और अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है।”
सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और माफियाओं पर कार्रवाई का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर कोई माफिया सरकारी या आबादी की जमीन पर कब्जा कर मॉल बनाता है या अवैध गतिविधियां चलाता है, तो वहां बुलडोजर जरूर चलेगा और उसे कोई रोक नहीं पाएगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर के मुद्दे पर सीएम योगी ने सपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों में योजनाओं में खुली लूट हुई। जेपीएनआईसी और गोमती रिवर फ्रंट जैसे प्रोजेक्ट्स का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद ये परियोजनाएं अधूरी रहीं। वहीं, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने तय लागत से कम खर्च में परियोजना को पूरा कर दिखाया।
कानून-व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में अब न दंगे होते हैं और न ही कर्फ्यू लगता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “अब यूपी में सब कुछ चंगा है।” इस दौरान उन्होंने सपा की पूर्व विधायक पूजा पाल का मामला उठाते हुए विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह माफियाओं के सामने झुक गए और एक बेटी को न्याय नहीं दिला सके।
अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी सीएम योगी ने विपक्ष को घेरा। उन्होंने बांग्लादेश में दलित हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों का जिक्र करते हुए कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति के कारण ही ऐसी स्थितियां पैदा हुईं। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर आवाज उठाते हैं, वे दलितों, किसानों और महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचारों पर चुप रहते हैं, क्योंकि उनके लिए ये वर्ग सिर्फ वोट बैंक हैं।
मुख्यमंत्री के इस आक्रामक भाषण के साथ ही शीतकालीन सत्र का समापन हुआ, जिसमें सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।










