नई दिल्ली। भारत ने सोमवार को 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर भव्य परेड के साथ राष्ट्रीय पर्व को पूरे गौरव और उत्साह के साथ मनाया। इस ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मुख्य अतिथि यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ परेड की सलामी ली। समारोह में देश की सैन्य ताकत, स्वदेशी हथियार प्रणालियों और राष्ट्रीय एकता का प्रभावशाली प्रदर्शन देखने को मिला।
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि यह पर्व हमें देश के अतीत, वर्तमान और भविष्य पर चिंतन करने का अवसर देता है। उन्होंने 15 अगस्त 1947 को मिली आजादी का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के साथ भारत अपनी राष्ट्रीय नियति का स्वयं निर्माता बना। राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय एकता के प्रयासों की सराहना की और ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ का उल्लेख करते हुए इसे भारत माता की आराधना का प्रतीक बताया, जो हर भारतीय के मन में देशभक्ति की भावना जगाता है।
कर्तव्य पथ पर आयोजित परेड में थलसेना, नौसेना और वायुसेना की संयुक्त शक्ति और समन्वय देखने को मिला। इस वर्ष परेड की सबसे बड़ी विशेषता ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की झांकी रही, जिसमें 1965, 1971 और 1999 के युद्धों से जुड़ी सैन्य सामग्री के साथ इंटीग्रेटेड ऑपरेशनल सेंटर का प्रदर्शन किया गया। इस झांकी ने तीनों सेनाओं के आपसी तालमेल और रणनीतिक क्षमता को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया।
परेड में स्वदेशी हथियार प्रणालियों ने भी सबका ध्यान खींचा। सूर्यास्त्र यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर, शक्तिबान, दिव्यास्त्र, हाई मोबिलिटी व्हीकल्स (HMV 6×6), धनुष गन सिस्टम, अमोघ एडवांस्ड टोएड आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS) और सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली का प्रदर्शन किया गया। वायुसेना के हेलीकॉप्टर ध्रुव द्वारा प्रहार फॉर्मेशन का शानदार प्रदर्शन हुआ, जिसकी अगुवाई कर्नल विजय प्रताप ने की।
टोही दल में 61 कैवलरी ने बैटल एरे वर्दी में मार्च किया, जबकि हाई मोबिलिटी रिकोनिसेंस व्हीकल और भारत का पहला स्वदेशी बख्तरबंद लाइट स्पेशलिस्ट व्हीकल भी परेड का हिस्सा रहे। इससे भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता का स्पष्ट संदेश गया।
इस अवसर पर वीरता पुरस्कारों का वितरण भी किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया। वे अंतरिक्ष यात्री के रूप में भारत के पहले व्यक्ति बने, जिन्हें शांतिकाल का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार मिला। इसके अलावा परमवीर चक्र विजेता सूबेदार मेजर (मानद कैप्टन) योगेंद्र सिंह यादव (सेवानिवृत्त), सूबेदार मेजर संजय कुमार सहित अन्य वीर जवानों को भी सम्मानित किया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुबह राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। राष्ट्रपति मुर्मू को 21 तोपों की सलामी दी गई। परेड की कमान लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार ने संभाली, जबकि मेजर जनरल नवराज ढिल्लों सेकंड-इन-कमांड रहे।
वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ और ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद मनाया गया यह गणतंत्र दिवस भारत की सैन्य क्षमता, स्वदेशी तकनीक और राष्ट्रीय गौरव का सशक्त प्रतीक बना। पूरे देश में इस अवसर पर उत्साह, एकता और देशभक्ति का माहौल देखने को मिला।










