वाराणसी। काशी में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए काशी विद्यापीठ चौकी प्रभारी दरोगा शिवाकर मिश्रा और उसके खास सिपाही गौरव कुमार को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दरोगा ने दहेज उत्पीड़न के एक मामले में आरोपी युवक का नाम चार्जशीट से हटाने के एवज में 50 हजार रुपये की मांग की थी।
पीड़ित युवक से लगातार रिश्वत का दबाव बनाया जा रहा था। दरोगा ने पैसे नहीं देने पर चार्जशीट में नाम जोड़ने और जेल भेजने की धमकी भी दी थी। परेशान होकर पीड़ित ने एंटी करप्शन विभाग से शिकायत कर दी।
कैसे हुई कार्रवाई
बुधवार को एंटी करप्शन वाराणसी की टीम इंस्पेक्टर सत्यवीर सिंह के नेतृत्व में काशी विद्यापीठ चौकी पहुंची। शिकायतकर्ता प्रहलाद गुप्ता दरोगा शिवाकर मिश्रा से मिलने पहुंचे। बातचीत के दौरान दरोगा ने रिश्वत की मांग की, जिस पर प्रहलाद ने 20 हजार रुपये देने की बात कही। दरोगा ने पैसे खुद लेने के बजाय चौकी में मौजूद सिपाही गौरव कुमार को देने के लिए कहा।
जैसे ही शिकायतकर्ता ने सिपाही गौरव को 20 हजार रुपये दिए और उसने रकम जैकेट की जेब में रखी, टीम ने उसे दबोच लिया। घबराकर सिपाही रुपये फेंककर भागने की कोशिश करने लगा, लेकिन उसे पकड़ लिया गया। बाद में दरोगा शिवाकर मिश्रा को भी हिरासत में ले लिया गया। दोनों को लालपुर पांडेयपुर थाने ले जाकर पूछताछ की जा रही है।
पूरा मामला
चंदौली के अलीनगर मुगलचक निवासी प्रहलाद गुप्ता और उनकी पत्नी ममता गुप्ता के बीच पारिवारिक विवाद चल रहा है। पत्नी की ओर से पति के खिलाफ पांच मुकदमे दर्ज कराए गए थे। इनमें से एक मामले की विवेचना काशी विद्यापीठ चौकी प्रभारी शिवाकर मिश्रा को सौंपी गई थी।
आरोप है कि विवेचना के दौरान दरोगा ने मुकदमे को खत्म करने के बदले 50 हजार रुपये की मांग की। पैसे न देने पर धाराएं बढ़ाकर जेल भेजने की धमकी दी जा रही थी। आखिरकार पीड़ित ने एंटी करप्शन टीम से संपर्क किया।
पीड़ित का बयान
प्रहलाद गुप्ता ने बताया कि दरोगा कई दिनों से रिश्वत का दबाव बना रहा था। आज जब वह पैसे देने चौकी पहुंचा तो दरोगा ने सिपाही को रकम देने को कहा। जैसे ही उसने 20 हजार रुपये सिपाही को दिए, टीम ने रंगे हाथ पकड़ लिया।
पहले भी विवादों में रहा है दरोगा
दरोगा शिवाकर मिश्रा की भर्ती वर्ष 2019 में हुई थी और वह बस्ती का रहने वाला है। सिपाही गौरव कुमार की भर्ती 2020 में हुई थी, जो गोरखपुर का निवासी है। शिवाकर मिश्रा पहले भी कई बार विवादों में रहा है। वह लंका थाने के एक इंस्पेक्टर का करीबी बताया जाता है और कई चौकियों का इंचार्ज रह चुका है। कार्यशैली को लेकर उसे पहले लाइन हाजिर और निलंबित भी किया जा चुका है।
आईआईटी-बीएचयू छात्रा से गैंगरेप के समय भी शिवाकर मिश्रा बीएचयू चौकी का प्रभारी था, तब उसकी भूमिका पर सवाल उठे थे। इसके अलावा नगवा चौकी इंचार्ज रहते हुए जमीन के मामले में पैसे लेकर कब्जा कराने की शिकायत भी सामने आई थी।
फिलहाल एंटी करप्शन इंस्पेक्टर नीरज कुमार की तहरीर पर दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है।










