महीनों से फंसी थी ट्रेड डील
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर लंबे समय से बातचीत चल रही थी, लेकिन किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सका था। दबाव बनाने के लिए अमेरिका ने भारतीय सामानों पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ भी लगा दिया था। ट्रंप प्रशासन की प्रमुख शर्त यह थी कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद करे, तभी ट्रेड डील को आगे बढ़ाया जाएगा।
हालांकि, अब ट्रंप ने दावा किया है कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमत हो गया है। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टैरिफ घटाने के फैसले का स्वागत तो किया है, लेकिन रूस से तेल आयात को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया।
भारत–EU ट्रेड डील से बदला समीकरण
न्यूजवीक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप के इस अचानक फैसले के पीछे भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच हाल ही में हुई बड़ी ट्रेड डील अहम कारण मानी जा रही है। भारत और EU के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत पूरी हो चुकी है, जिसे दोनों पक्षों ने अब तक की सबसे बड़ी ट्रेड डील बताया है।
इस समझौते से वैश्विक स्तर पर भारत की मोलभाव की ताकत बढ़ गई, जिससे अमेरिका को यह चिंता सताने लगी कि कहीं वह रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी में पीछे न छूट जाए। प्रधानमंत्री मोदी पहले ही इस डील को विकास, निवेश और रणनीतिक सहयोग के लिए अहम कदम बता चुके हैं।
टॉप लेवल पर लिया गया फैसला
रिपोर्ट के अनुसार, घटनाक्रम बेहद योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ा। ट्रेड डील के ऐलान से ठीक पहले भारत में नए अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत की है। इसके कुछ ही देर बाद टैरिफ में कटौती का ऐलान कर दिया गया। इससे साफ है कि यह फैसला सीधे शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर लिया गया।
रूस का तेल बना अमेरिका की चिंता
अमेरिका के लिए यह सिर्फ व्यापार का नहीं, बल्कि ऊर्जा नीति और वैश्विक राजनीति का भी मुद्दा है। व्हाइट हाउस रूस की तेल से होने वाली कमाई को सीमित करना चाहता है ताकि यूक्रेन युद्ध को लेकर दबाव बढ़ाया जा सके। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने हाल ही में दावा किया था कि भारत द्वारा रूस से तेल आयात लगभग खत्म हो चुका है, जिससे टैरिफ कम करने का रास्ता साफ हुआ।
डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा है कि भारत अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदेगा और भविष्य में वेनेजुएला से भी तेल आयात कर सकता है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि रूस या ईरान से जुड़े किसी भी भू-राजनीतिक तनाव की स्थिति में वैश्विक तेल कीमतों में अचानक उछाल न आए।
दोनों नेताओं को क्या मिला फायदा?
राजनीतिक दृष्टि से यह डील दोनों देशों के लिए फायदेमंद मानी जा रही है। ट्रंप इसे रूस पर दबाव बनाने की अपनी रणनीति की सफलता के तौर पर पेश कर सकते हैं, जबकि प्रधानमंत्री मोदी को कम टैरिफ के जरिए भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है। साथ ही अमेरिका चाहता है कि भारत चीन के विकल्प के रूप में एक मजबूत मैन्युफैक्चरिंग और रक्षा साझेदार बने, जबकि भारत अमेरिका के साथ मजबूत रिश्तों का सीधा आर्थिक लाभ देखना चाहता है।










