मिर्जापुर। पूर्वांचल की ऐतिहासिक धरोहर और रहस्यों से भरा चुनार किला अब नए रूप में नजर आएगा। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने इस विश्वप्रसिद्ध किले को अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की बड़ी योजना शुरू कर दी है। करीब 700 करोड़ रुपये की लागत से यह परियोजना पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर पूरी की जाएगी।
पर्यटन विभाग ने राजस्थान की एमआरएस ग्रुप को संरक्षण और सौंदर्यीकरण का कार्य सौंपा है। कंपनी के निवेशक लक्ष्यदीप के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को पूरा होने में लगभग 4 से 5 वर्ष का समय लगेगा।
संरक्षण के साथ आधुनिक सुविधाएं
अधिकारियों का कहना है कि विकास कार्य ‘संरक्षण के साथ आधुनिकीकरण’ की अवधारणा पर आधारित होगा। किले की ऐतिहासिक बनावट और मूल संरचना से कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। इसके प्राचीन स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक सुविधाएं जोड़ी जाएंगी, ताकि पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके।
इतिहास, तिलिस्म और गौरव की झलक
चुनार किला सदियों से इतिहास का साक्षी रहा है। इसका संबंध उज्जैन के राजा विक्रमादित्य, उनके भाई राजा भर्तृहरि, मुगल बादशाह हुमायूं और अफगान शासक शेरशाह सूरी जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों से जुड़ा है। किले की दीवारों पर इन शासकों की गाथाओं को कलाकृतियों और शिलालेखों के माध्यम से दर्शाया जाएगा।
देवकीनंदन खत्री के प्रसिद्ध उपन्यास ‘चंद्रकांता’ में वर्णित इस किले की तिलिस्मी छवि को भी आधुनिक तकनीक के जरिए पर्यटकों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे इसकी ऐतिहासिक और साहित्यिक महत्ता और बढ़ेगी।
उपेक्षित हिस्से भी खुलेंगे आमजन के लिए
परियोजना के तहत किले के कई ऐसे हिस्सों को भी विकसित कर पर्यटन सर्किट में शामिल किया जाएगा, जो अब तक बंद या उपेक्षित रहे हैं। इनमें सोनवा मंडप, रहस्यमयी सुरंगें, गहरे तहखाने और ऐतिहासिक फांसी घर प्रमुख हैं। इन स्थलों को सुरक्षित बनाकर दर्शकों के लिए खोला जाएगा।
कंपनी स्थानीय इतिहासकारों और बुजुर्गों से जानकारी जुटाकर किले से जुड़ी लोककथाओं और ऐतिहासिक तथ्यों को भी संरक्षित करेगी।
हेरिटेज होटल और बढ़ेंगे रोजगार
किला परिसर में हेरिटेज होटल, रेस्टोरेंट और सांस्कृतिक केंद्र विकसित करने की योजना है। इससे विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी। साथ ही मिर्जापुर, सोनभद्र और वाराणसी क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।
पर्यटन विभाग किले को जल परिवहन से जोड़ने की संभावनाओं पर भी काम कर रहा है। यदि यह योजना सफल होती है तो चुनार किला आने वाले वर्षों में पूर्वांचल का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र बन सकता है।










