मिडिल ईस्ट में ईरान, इज़रायल और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के चलते हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। इसी बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सख्त बयान जारी करते हुए कहा है कि क्षेत्र में अतिरिक्त अमेरिकी सैन्य इकाइयों की तैनाती की जा रही है।
उन्होंने संकेत दिया कि यदि संघर्ष और बढ़ता है, तो अमेरिका के पास मौजूद अत्याधुनिक ग्रेविटी बम जैसे हथियारों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ग्रेविटी बम क्या होता है और यह कितना खतरनाक होता है।
क्या होता है ग्रेविटी बम?
ग्रेविटी बम एक ऐसा हथियार है जिसे विमान से गिराया जाता है और यह गुरुत्वाकर्षण (ग्रेविटी) के प्रभाव से अपने लक्ष्य की ओर नीचे गिरता है। मिसाइलों के विपरीत, जो खुद आगे बढ़कर लक्ष्य तक पहुंचती हैं, ग्रेविटी बम अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए विमान की ऊंचाई और दिशा पर निर्भर करते हैं।
आधुनिक ग्रेविटी बम पहले के साधारण फ्री-फॉल बमों से कहीं अधिक उन्नत हैं। इनमें जीपीएस गाइडेंस सिस्टम और लेजर टारगेटिंग जैसी तकनीकें लगी होती हैं, जिससे ये नीचे गिरते समय भी अपना रास्ता बदलकर लक्ष्य पर बेहद सटीक हमला कर सकते हैं।
न्यूक्लियर ग्रेविटी बम भी मौजूद
अमेरिका ने हाल के वर्षों में एक उन्नत परमाणु ग्रेविटी बम B61-13 nuclear gravity bomb भी विकसित किया है। इस बम को विशेष रूप से जमीन के नीचे बने बंकर, मजबूत सैन्य ठिकानों और गहराई में छिपी परमाणु सुविधाओं को नष्ट करने के लिए तैयार किया गया है।
इसे स्ट्रैटेजिक बॉम्बर और आधुनिक लड़ाकू विमानों के जरिए गिराया जा सकता है।
कितनी होती है इसकी ताकत?
ग्रेविटी बम की विनाश क्षमता उसके प्रकार पर निर्भर करती है। सामान्य ग्रेविटी बम इमारतों, रनवे और सैन्य ठिकानों को नष्ट करने के लिए बनाए जाते हैं।
हालांकि, परमाणु ग्रेविटी बम कहीं ज्यादा खतरनाक होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इसकी विस्फोटक क्षमता 360 किलोटन तक हो सकती है। तुलना करें तो यह 1945 में हिरोशिमा परमाणु बम विस्फोट में गिराए गए एटॉमिक बम से लगभग 24 गुना अधिक शक्तिशाली माना जाता है।
बंकर बस्टर के रूप में उपयोग
आधुनिक ग्रेविटी बमों का मुख्य उद्देश्य जमीन के नीचे बने सैन्य ठिकानों या परमाणु सुविधाओं को नष्ट करना होता है। कई देश अपने संवेदनशील सैन्य ठिकानों को हवाई हमलों से बचाने के लिए जमीन के अंदर बनाते हैं।
इसी वजह से न्यूक्लियर ग्रेविटी बमों को बंकर बस्टर हथियार के रूप में डिजाइन किया जाता है। यह बम पहले जमीन या कंक्रीट की मोटी परतों को भेदता है और फिर अंदर जाकर विस्फोट करता है।
बड़े पैमाने पर तबाही की आशंका
यदि कभी परमाणु ग्रेविटी बम का इस्तेमाल किया जाता है, तो इससे बड़े स्तर पर तबाही मच सकती है। परमाणु विस्फोट से भारी मात्रा में रेडिएशन फैलता है, जो लंबे समय तक पर्यावरण को दूषित कर सकता है।
इसके अलावा इससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है और बड़े पैमाने पर मानवीय संकट भी पैदा हो सकता है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ऐसे घातक हथियारों की चर्चा ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।










