जौनपुर: जिले के Jalalpur थाना क्षेत्र के संघईपुर (कादीपुर) गांव में 20 महीने बाद प्रतिशोध की आग फिर भड़क उठी। रोहित हत्याकांड में आरोपी रहे आशीष उर्फ चिघड़ू की उसी अंदाज में चाकू से गोदकर नृशंस हत्या कर दी गई, जिस तरह उसने 2024 में रोहित चौहान की हत्या की थी। इस वारदात के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।
रोहित हत्याकांड से शुरू हुई थी दुश्मनी
दरअसल, 23 सितंबर 2024 को गांव के ही 21 वर्षीय रोहित चौहान की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। बताया जाता है कि रोहित बगीचे में मोबाइल पर गेम खेल रहा था, तभी आशीष उर्फ चिघड़ू वहां पहुंचा और अचानक उसके बाल पकड़कर गर्दन पर चाकू से कई वार कर दिए। मौके पर मौजूद लोग इस घटना से घबरा गए और भाग खड़े हुए।
इस वारदात के पीछे पुरानी रंजिश बताई गई, जिसमें रोहित और चिघड़ू के पिता के बीच विवाद हुआ था।
घटना के बाद गांव में भड़का था गुस्सा
रोहित की हत्या के बाद गांव में आक्रोश फैल गया था। गुस्साए ग्रामीणों ने आरोपी चिघड़ू के घर में आग लगा दी थी। स्थिति को संभालने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा था। पुलिस ने आरोपी और उसके पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
जमानत पर बाहर आने के बाद फिर भड़की रंजिश
ग्रामीणों के अनुसार, चिघड़ू 28 अगस्त 2025 को जमानत पर जेल से बाहर आया था और अपने ननिहाल मड़ियाहूं में रह रहा था।
बताया जा रहा है कि घटना के दिन वह बाइक से गांव आया और रोहित के घर के पास पहुंचकर कुछ आपत्तिजनक बातें कह दीं, जिससे पुरानी रंजिश फिर भड़क उठी।
उसी अंदाज में ली गई हत्या का बदला
इसके बाद रोहित पक्ष के लोगों ने कानून हाथ में लेते हुए चिघड़ू पर हमला कर दिया और उसे चाकू से गोद-गोदकर मौत के घाट उतार दिया।
इस घटना ने एक बार फिर गांव में सनसनी फैला दी है और लोग दहशत में हैं।
गांव में सन्नाटा, लोग बोलने से कतरा रहे
संघईपुर से लेकर सिरकोनी तक लोग इस घटना को लेकर सहमे हुए हैं। कोई भी खुलकर कुछ बोलने को तैयार नहीं है। लोग आपस में चर्चा तो कर रहे हैं, लेकिन किसी बाहरी व्यक्ति को देखकर चुप्पी साध लेते हैं।
घटना के बाद पुलिस ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है और तनाव को देखते हुए अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है और आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
बदले की आग ने ली एक और जान
यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि आपसी रंजिश और बदले की भावना किस तरह हिंसा को जन्म देती है। कानून को हाथ में लेने की यह प्रवृत्ति समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है।










