नई दिल्ली। देश में बढ़ती पेट्रोल और डीजल की कीमतों से राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी में भारी कटौती के बाद अब सरकार ने ईंधन की कीमतों की हर 15 दिन में समीक्षा करने का फैसला किया है। इस रणनीति का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा लाभ आम जनता तक पहुंचाना है।
एक्साइज ड्यूटी में कटौती का असर
सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपए प्रति लीटर की कटौती की है। इसके बाद पेट्रोल पर केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी घटकर 11.9 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 7.8 रुपए प्रति लीटर रह गई है। हालांकि, फिलहाल इस कटौती का सीधा असर रिटेल कीमतों पर नहीं पड़ेगा।
क्या है सरकार की नई रणनीति?
एक्साइज ड्यूटी में कमी के बाद सरकार फिलहाल “वेट एंड वॉच” की स्थिति में है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी के मुताबिक, यह कदम तेल विपणन कंपनियों के अंडर-रिकवरी को कम करने के लिए उठाया गया है।
सरकार का मानना है कि इस रणनीति से कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव को नियंत्रित किया जा सकेगा और जरूरत पड़ने पर तुरंत निर्णय लिया जा सकेगा।
मिडिल ईस्ट संकट का असर
मध्य पूर्व में जारी तनाव, खासकर अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर लगाए गए अवरोध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है।
ब्रेंट क्रूड की कीमत फरवरी के अंत में 68 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर मार्च की शुरुआत में 100 डॉलर के पार पहुंच गई, जो आगे बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह रूट
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के 20-25% कच्चे तेल और गैस के परिवहन का प्रमुख मार्ग है। भारत अपनी करीब 40-50% तेल जरूरत इसी रास्ते से पूरी करता है। इसके अलावा कतर और UAE से आने वाली LNG और LPG की सप्लाई भी इसी रूट से होती है, जो देश के करोड़ों परिवारों के लिए जरूरी है।
सरकार ने दिया भरोसा: कोई कमी नहीं
सरकार ने साफ किया है कि देश में फिलहाल तेल और गैस की कोई कमी नहीं है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और अगले दो महीनों के लिए सप्लाई सुनिश्चित कर ली गई है।
रिफाइनरी पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और बाजार में आपूर्ति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है।
सतर्कता के साथ आगे बढ़ रही सरकार
सरकार ने एक संतुलित (कैलिब्रेटेड) रणनीति अपनाई है। डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त ड्यूटी और सेस लगाया गया है।
अब हर 15 दिन में कीमतों की समीक्षा से सरकार बाजार की स्थिति के अनुसार तेजी से फैसले ले सकेगी।










