मिर्जापुर: आईजीआरएस (IGRS) शिकायतों के निस्तारण में प्रदेश में बेहतर रैंकिंग मिलने के बाद अब उसी प्रक्रिया पर सवाल खड़े होने लगे हैं। देहात कोतवाली क्षेत्र के बरकछा कलां चौकी पर तैनात दारोगा पर शिकायतों के फर्जी निस्तारण का गंभीर आरोप सामने आया है।
बरकछा निवासी पीड़ित रामा ने बताया कि उन्होंने फरवरी माह में जमीन विवाद को लेकर आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि जांच के लिए पहुंचे दारोगा ने बिना वास्तविक समाधान किए ही शिकायत का निस्तारण कर दिया।
बिना बयान के बना दिए गवाह
पीड़ित का कहना है कि रिपोर्ट में ऐसे लोगों को गवाह बना दिया गया, जिन्होंने कभी कोई बयान ही नहीं दिया।
नामजद गवाह बनाए गए स्थानीय व्यवसायी विकास तिवारी ने साफ कहा कि उन्होंने इस मामले में कोई गवाही नहीं दी और उन्हें इस पूरे प्रकरण की जानकारी तक नहीं थी।
दो मामलों में सामने आई गड़बड़ी
केस 1:
शिकायत संख्या 20019926002073 के निस्तारण में विकास तिवारी को गवाह बना दिया गया, जबकि उन्होंने किसी भी प्रकार की गवाही से इनकार किया है।
केस 2:
दूसरी शिकायत संख्या 300100026000277 में भी वही स्थिति दोहराई गई। आरोप है कि दारोगा ने फिर से बिना पूछे उनका नाम गवाह के रूप में दर्ज कर दिया।
दारोगा का बयान- ‘दबाव में करना पड़ता है’
इस मामले में दारोगा रमाशंकर यादव का एक चौंकाने वाला बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि IGRS निस्तारण में गवाहों के नाम देने का दबाव रहता है, इसलिए “प्रतिष्ठित लोगों” के नाम डाल दिए जाते हैं और यह सामान्य प्रक्रिया है।
अधिकारियों ने मानी लापरवाही
मामले पर क्षेत्राधिकारी मुनींद्र पाल ने कहा कि प्रथम दृष्टया दारोगा की गंभीर लापरवाही सामने आई है। जांच रिपोर्ट पुलिस अधीक्षक को भेज दी गई है और आगे की कार्रवाई उसी आधार पर की जाएगी।
पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल
पीड़ित का आरोप है कि जमीन पर कब्जा जारी है, लेकिन शिकायतों का सिर्फ कागजी निस्तारण किया जा रहा है। इससे न सिर्फ पीड़ित को न्याय नहीं मिल रहा, बल्कि पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।








