महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने मराठवाड़ा समेत राज्य में आई बाढ़ और अतिवृष्टि को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र का शायद ही कोई हिस्सा बचा होगा, जहां भारी बारिश और बाढ़ ने तबाही न मचाई हो। कई जगह खेत पूरी तरह बह गए हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था चरमरा गई है।
किसानों को बड़ा मुआवजा देने की मांग
राज ठाकरे ने सरकार से कहा कि इस आपदा को किसी सीमा में बांधे बिना “सार्वत्रिक ओला-सूखा” घोषित किया जाए। उन्होंने 7-8 हजार रुपये प्रति एकड़ की भरपाई को “तुच्छ” बताते हुए न्यूनतम 30 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने की मांग की। उनका कहना है कि किसानों को दोबारा संभलने में कम से कम एक साल का वक्त लगेगा।
केंद्र से मदद लेने पर जोर
राज ठाकरे ने सुझाव दिया कि राज्य सरकार को समय पर केंद्र से राहत पैकेज मांगना चाहिए। बिहार को पहले ऐसा पैकेज मिल चुका है, तो महाराष्ट्र को देने में कोई अड़चन नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली दौरे सिर्फ राजनीतिक मुद्दों या गठबंधन की समस्याओं तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि राज्य के हित में भी होने चाहिए।
शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर चिंता
राज ठाकरे ने चेताया कि बाढ़ के बाद बच्चों की पढ़ाई सबसे ज्यादा प्रभावित होती है। सरकार को किताबें और कॉपियां उपलब्ध कराने के साथ ही उनकी परीक्षाओं को लेकर मानसिक स्थिति का भी ध्यान रखना चाहिए। साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को भी सतर्क रहने की सलाह दी ताकि बीमारियां न फैलें और दवाओं की कमी न हो।
किसानों के कर्ज पर राहत
उन्होंने कहा कि बाढ़ के बाद किसानों पर बैंकों का किस्तों का दबाव बढ़ेगा। ऐसे में सरकार को पहले से ही बैंकों को उचित निर्देश देने चाहिए ताकि किसान परेशान न हों।
अंत में, राज ठाकरे ने जोर देकर कहा कि सरकार का कर्तव्य है कि वह खेतों पर जाकर किसानों की समस्याएं समझे और उनके आंसू पोंछे। लेकिन इस कार्य को प्रचार का साधन न बनाया जाए। उन्होंने दोहराया कि किसानों और उनके परिवारों को दोबारा खड़ा करने के लिए सरकार को कम से कम 30 से 40 हजार रुपये प्रति एकड़ की सहायता तुरंत घोषित करनी चाहिए।










