“बांके बिहारी मंदिर में खत्म हुआ वीआईपी दौर, अब न माला मिलेगी, न पटुका, सबके लिए एक समान नियम”

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मथुरा के वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर में अब वीआईपी संस्कृति समाप्त कर दी गई है। मंदिर के सेवायत गोस्वामी समाज ने फैसला लिया है कि अब किसी भी श्रद्धालु को विशेष दर्जा नहीं मिलेगा। यह निर्णय मंदिर की गरिमा, मर्यादा और समानता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।
मथुरा। मथुरा के वृंदावन स्थित प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में अब वीआईपी संस्कृति पर विराम लग गया है। मंदिर के सेवायत गोस्वामी समाज ने यह ऐलान किया है कि अब किसी भी श्रद्धालु को विशेष दर्जा नहीं मिलेगा। मंदिर में आने वाले वीआईपी भक्तों को अब न तो ठाकुरजी की प्रसादी माला दी जाएगी, न पटुका ओढ़ाया जाएगा और न ही बांसुरी या प्रसाद की डलिया भेंट स्वरूप दी जाएगी। यह निर्णय मंदिर कॉरिडोर और न्यास के खिलाफ चल रहे विरोध के बीच लिया गया है।
अब तक मंदिर में आने वाले खास मेहमानों — जैसे नेता, अफसर, उद्योगपति या अन्य वीआईपी — को विशेष स्वागत के साथ दर्शन का मौका मिलता था। गोस्वामी उन्हें मंदिर के मुख्य द्वार से गर्भगृह तक ले जाकर दर्शन करवाते थे और विशेष प्रसाद भेंट करते थे। मगर अब यह परंपरा समाप्त कर दी गई है। गोस्वामी समाज का कहना है कि ठाकुरजी की सेवा में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए, और अब सभी श्रद्धालु समान रूप से पूजा-अर्चना करेंगे।
गोस्वामी समाज के सदस्य हिमांशु गोस्वामी ने बताया कि यह फैसला ठाकुर बांके बिहारी की प्रेरणा से लिया गया है। उन्होंने कहा कि जो लोग ठाकुरजी की सेवा में बाधा बन रहे हैं या मंदिर की मर्यादा व परंपरा के खिलाफ कार्य कर रहे हैं, उनका न स्वागत होगा और न अपमान, बल्कि अब मंदिर में हर कोई सिर्फ श्रद्धालु के रूप में ही देखा जाएगा — चाहे वह किसी भी पद या प्रतिष्ठा का हो।
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Author: News Rastra

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