“शशि थरूर का बड़ा बयान: ‘आज का भारत 1975 का भारत नहीं है’, इमरजेंसी को बताया लोकतंत्र के लिए चेतावनी”

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कांग्रेस नेता शशि थरूर ने इमरजेंसी की 50वीं बरसी पर लिखा कि 1975 की तानाशाही से आज का भारत अलग है।उन्होंने इमरजेंसी को लोकतंत्र के लिए चेतावनी बताते हुए संजय गांधी के फैसलों की तीखी आलोचना की।थरूर ने कहा कि आज जनता पहले से अधिक जागरूक है, लेकिन लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए निरंतर सतर्कता जरूरी है।

कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ लेखक शशि थरूर ने इमरजेंसी की 50वीं वर्षगांठ पर एक लेख लिखते हुए 1975 की उस काली रात को याद किया, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लागू किया था। थरूर ने लिखा कि इमरजेंसी सिर्फ इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि लोकतंत्र के लिए एक गहरी चेतावनी है, जिसे हमें कभी नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि आज का भारत 1975 के भारत से कहीं ज्यादा जागरूक, मज़बूत और आत्मनिर्भर लोकतंत्र है। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने ये भी चेताया कि अगर कार्यपालिका को बिना नियंत्रण छोड़ दिया जाए, तो वो लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर सकती है।
थरूर ने अपने लेख में बताया कि कैसे इमरजेंसी के दौरान मौलिक अधिकारों का हनन, मीडिया सेंसरशिप, राजनीतिक विरोधियों की गिरफ्तारी, और न्यायपालिका पर दबाव जैसी घटनाएं आम हो गई थीं। उन्होंने खासतौर पर संजय गांधी के फैसलों की आलोचना की—जैसे जबरन नसबंदी अभियान, झुग्गियों का तोड़ा जाना और आम नागरिकों पर अत्याचार। उन्होंने इन कार्रवाइयों को “निर्दयता की हद” बताया।
शशि थरूर ने लिखा, “इमरजेंसी ने हमें सिखाया कि आज़ादी छीनने की प्रक्रिया धीरे-धीरे शुरू होती है। पहले छोटे बहाने, फिर धीरे-धीरे पूरी आज़ादी पर शिकंजा कसने लगता है।”हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आज भारत में लोकतांत्रिक चेतना पहले से कहीं अधिक है। मीडिया, न्यायपालिका और विपक्ष भले ही चुनौतियों का सामना कर रहे हों, लेकिन लोग अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठा रहे हैं, और यही लोकतंत्र की असली ताकत है।
थरूर का ये लेख न सिर्फ इमरजेंसी के इतिहास की याद दिलाता है, बल्कि यह भी बताता है कि लोकतंत्र को केवल चुनाव से नहीं, बल्कि निरंतर निगरानी और जवाबदेही से बचाया जा सकता है।
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Author: News Rastra

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