भारत बंद 2025: 25 करोड़ कर्मचारियों की देशव्यापी हड़ताल, बैंकिंग से लेकर कोयला खनन तक ठप

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

 

बुधवार 9 जुलाई को केंद्र सरकार की श्रमिक-विरोधी नीतियों के खिलाफ 25 करोड़ कर्मचारियों ने भारत बंद का आह्वाहन किया। बैंकिंग, बीमा, कोयला खनन, डाक सेवाएं और परिवहन सहित कई क्षेत्रों में कामकाज ठप रहा। मुख्य मांगों में नई श्रम संहिताओं का विरोध, महंगाई और बेरोजगारी शामिल हैं। संयुक्त किसान मोर्चा सहित कई किसान संगठनों ने भी इस हड़ताल का समर्थन किया।
सरकार की श्रमिक-विरोधी नीतियों के खिलाफ उठी आवाज
देश भर में भारत बंद का व्यापक असर देखने को मिला। यह बंदी 10 केंद्रीय श्रमिक संगठनों और उनकी सहयोगी इकाइयों द्वारा की गई, जो केंद्र सरकार की श्रमिक, किसान और राष्ट्र विरोधी नीतियों का विरोध कर रहे हैं।
इस हड़ताल में बैंकिंग, बीमा, कोयला खनन, डाक सेवाएं, फैक्ट्रियां, राजमार्ग निर्माण, और राज्य परिवहन जैसे क्षेत्रों के कर्मचारी बड़ी तादात में शामिल हुए। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की महासचिव अमरजीत कौर के मुताबिक़, इस व्यापक हड़ताल में करीब 25 करोड़ कर्मचारियों की भागीदारी रही।
कौन – कौन से क्षेत्र रहे प्रभावित?
  • बैंकिंग सेवाएं: अधिकांश बैंकों में कामकाज ठप रहा।
  • बीमा और डाक सेवाएं: बड़ी संख्या में बीमा कंपनियों और डाकघरों में कामकाज प्रभावित रहा।
  • खनन और औद्योगिक क्षेत्र: कोयला, स्टील और अन्य खनन क्षेत्रों में उत्पादन स्थगित रहा।
  • राज्य परिवहन: कुछ राज्यों में बस सेवाएं सीमित रहीं।
हड़ताल का कारण और प्रमुख मांगे
  • नई श्रम संहिताएं, जिनसे श्रमिकों के अधिकारों में कटौती हो रही है। इसमें सुधार की मांग की गई।
  • 10 वर्षों से वार्षिक श्रम सम्मेलन का आयोजन नहीं। श्रमिकों के उद्धार के लिए श्रम सम्मेलन के आयोजन की आवश्यकता।
  • महंगाई, बेरोजगारी और वेतन में कटौती जैसी समस्याएं। इन समस्याओं से निपटने लिए सरकार सही कदम उठाए।
किसानों और ग्रामीण मजदूरों का समर्थन
संयुक्त किसान मोर्चा और कई कृषि श्रमिक संगठनों ने भी इस हड़ताल का समर्थन किया। इससे पहले नवंबर 2020, मार्च 2022 और फरवरी 2024 में भी ऐसे ही राष्ट्रव्यापी हड़ताल देखी गई है।

 

 

News Rastra
Author: News Rastra

Leave a Comment

और पढ़ें