अरविंद केजरीवाल का “नोबेल पुरस्कार” वाला बयान निश्चित ही एक व्यंग्य के तौर पर सामने आया, लेकिन इसने राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर आम आदमी पार्टी इसे अपने कामकाज की सराहना मानती है, वहीं विपक्ष इसे एक आरोपी का आत्ममुग्ध और भ्रमित करने वाला बयान बता रहा है।











