वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) की पीएचडी रिसर्च स्कॉलर नाजुक भसीन की शनिवार रात सर सुंदरलाल अस्पताल के एसीयू वार्ड में इलाज के दौरान मौत हो गई। उन्हें गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था, लेकिन देर रात करीब 2 बजे उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद विश्वविद्यालय में आक्रोश का माहौल है।
छात्रों ने निकाला कैंडल मार्च, जताया विरोध
रविवार को BHU के छात्रों ने नाजुक की याद में कैंडल मार्च निकाला और बिरला हॅास्टल, सिंह द्वार पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान छात्रों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रशासनिक जवाबदेही की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ ऐसा हो सकता है, तो आम मरीजों की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।

रेस्टोरेंट का खाना बना कारण?
नाजुक की साथी छात्राओं के अनुसार, तीन दिन पहले उन्होंने लंका स्थित एक रेस्टोरेंट में भोजन किया था। इसके बाद उल्टियां शुरू हुईं, लेकिन इमरजेंसी में दिखाने पर कोई सीनियर डॉक्टर मौजूद नहीं था। सिर्फ प्राथमिक इलाज देकर उन्हें वापस हॉस्टल भेज दिया गया। जब हालत और बिगड़ी, तो उन्हें एसीयू में भर्ती कराया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। भर्ती के वक्त उनका बीपी काफी लो और पल्स रेट 45 थी।
मानसिक स्वास्थ्य का भी चल रहा था इलाज
डॉक्टरों के अनुसार, नाजुक 2023 से मानसिक स्वास्थ्य के लिए परामर्श ले रही थीं और नियमित रूप से कुछ दवाएं भी ले रही थीं। हालांकि, छात्राओं का आरोप है कि इस जानकारी को छिपाया गया और अस्पताल प्रशासन ने पारदर्शिता नहीं बरती।

प्रतिभाशाली रिसर्चर थीं नाजुक
जम्मू सेंट्रल यूनिवर्सिटी से एमफिल कर चुकीं नाजुक भसीन BHU में अगस्त 2022 से पीएचडी कर रही थीं। उनका शोध विषय था “कश्मीर के स्मार्ट शहरों के पर्यावरण और नगरीय व्यवस्था”। उनके तीन रिसर्च पेपर अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हो चुके थे और वे 2027 तक अपना पीएचडी कार्य पूरा करने वाली थीं। नाजुक, BHU के न्यू पीएचडी गर्ल्स हॉस्टल के कमरा नंबर 110 में रह रही थीं। साथी छात्राओं ने उन्हें एक खुशमिजाज और समर्पित स्कॉलर बताया।











