Kolkata : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने एक बार फिर अपनी बंगाली अस्मिता को केंद्र में रखकर कोलकाता की सड़कों पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। तेज बारिश के बीच भीगते हुए उन्होंने बुधवार, को एक तीन किलोमीटर लंबा मार्च निकाला, जिसमें भाजपा शासित राज्यों में बंगाली भाषी लोगों के उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाई गई।
टीएमसी ने दिखाई एकजुटता
इस विरोध मार्च में ममता बनर्जी के साथ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बड़े नेता, जिसमें अभिषेक बनर्जी भी शामिल थे, कदम से कदम मिलाकर चले। कोलकाता की सड़कों पर यह मार्च न केवल एक राजनीतिक संदेश था, बल्कि बंगाली समुदाय के समर्थन में एक भावनात्मक अपील भी बनकर सामने आया।
ममता ने केंद्र पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “केंद्र सरकार ने एक निर्देश जारी किया है जिसमें कहा गया है कि संदिग्ध बांग्लादेशियों को पकड़कर डिटेंशन सेंटर में रखा जाए। यह आदेश भाजपा शासित सभी राज्यों को भेजा गया है। क्या आप हर उस व्यक्ति को जेल भेज देंगे जो बंगाली बोलता है?”
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पश्चिम बंगाल भारत का हिस्सा नहीं है? उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य के बाहर काम करने वाले बंगाली श्रमिक अपनी मेहनत और कौशल की वजह से काम कर रहे हैं, न कि किसी जबरदस्ती के कारण।
खेला होबे का नारा दोहराया
जनसभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने दोबारा “खेला होबे” का नारा बुलंद किया। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा,
“अब मैं और अधिक बंगाली में बोलूंगी। अगर हिम्मत है तो मुझे डिटेंशन कैंप में डाल दो, लेकिन याद रखना- बीजेपी, खेला होबे! बस इंतजार करो!”
जनता से भावनात्मक अपील
‘बीजेपी छी छी’ के नारों के बीच ममता बनर्जी ने बंगाली पहचान को कमजोर करने की कोशिशों के खिलाफ जमकर आक्रोश जताया। उन्होंने कहा कि भाजपा बंगाली भाषियों को रोहिंग्या या घुसपैठिया कहकर बदनाम कर रही है, जो न केवल गलत है बल्कि समाज को बांटने की कोशिश भी है।










