भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने NCERT की नई किताबों में मुगलों के शासनकाल की क्रूरता, अत्याचार और धार्मिक असहिष्णुता को शामिल किए जाने का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि दशकों तक विदेशी हमलावरों को महानायक के रूप में प्रस्तुत करने की जो गलती हुई है, अब उसे सुधारने का समय आ गया है।
नकवी ने कहा, “मुझे लगता है कि इतिहास में जिन विदेशी आक्रांताओं ने हमारे देश को नुकसान पहुंचाया, उनकी अपराधिक गतिविधियों से छात्रों को अवगत कराना ज़रूरी है। इससे उन्हें सही और संतुलित इतिहास जानने का अवसर मिलेगा।”
क्या गिरनी चाहिए ताजमहल और लाल किले जैसी इमारतें?
जब नकवी से यह पूछा गया कि अगर मुगलों के इतिहास को हटाया जा रहा है तो क्या ताजमहल और लाल किले जैसी उनकी निशानियों को भी गिरा देना चाहिए? इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि “किसी चीज की ऐतिहासिक पहचान और उसकी क्रूरता में फर्क होता है।” उन्होंने कहा कि पुराने इतिहासकारों ने मुगलों को अतिरंजित रूप से महिमामंडित किया, जबकि भारत की सनातन संस्कृति विश्व की सबसे पुरानी और समृद्ध परंपरा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भगवद गीता, रामायण और अन्य धार्मिक ग्रंथों को पढ़ना और समझना सभी वर्गों के लिए आवश्यक है।
रामपुर गुरुद्वारा विवाद पर दी प्रतिक्रिया
रामपुर में गुरुद्वारे से जुड़े विवाद पर भी नकवी ने अपनी राय दी। उन्होंने कहा कि यह मामला बहुत पुराना है और इससे जुड़े दोनों पक्ष एक ही समाज के हैं। उन्होंने कहा कि, “ऐसे विवादों में कोई भी बात बढ़ाने की बजाय शांति और समझदारी से समाधान निकालना चाहिए।” उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर राज्य मंत्री बलदेव सिंह ओलक से बात की है और वे दूसरी तरफ के लोगों से भी बात कर स्थिति को समझने की कोशिश करेंगे।
रामपुर दौरे पर पहुंचे थे नकवी
मुख्तार अब्बास नकवी बुधवार को रामपुर पहुंचे जहां भाजपा जिलाध्यक्ष हरीश गंगवार और पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। अपने निजी आवास शंकरपुर में कार्यकर्ताओं से मुलाकात के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में ये सभी बातें साझा कीं।










