दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में स्थित ऐतिहासिक हुमायूं का मकबरा परिसर में शुक्रवार (15 अगस्त) को एक बड़ा हादसा हो गया। दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के जिला मजिस्ट्रेट डॉ. श्रवण बागरिया ने पुष्टि की कि इस घटना में 6 लोगों की मौत हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक, मकबरे के पीछे स्थित फतेह शाह दरगाह का एक हिस्सा अचानक गिर गया। हादसे के समय तेज बारिश हो रही थी और कई लोग दरगाह में रुककर बारिश थमने का इंतजार कर रहे थे। मलबे में दबने से कई लोग घायल हुए, जिनमें से 10-12 को तुरंत बाहर निकाला गया। घायलों का इलाज एम्स और LNJP अस्पताल में चल रहा है।
कमजोर ढांचा और बारिश बनी वजह
फायर ऑफिसर मुकेश वर्मा ने बताया कि दरगाह के दो कमरे गिर गए थे। संरचना काफी पुरानी और कमजोर थी, जिससे बारिश के चलते यह हादसा हुआ। पांच घायलों का इलाज जारी है और रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा कर लिया गया है।
मृतकों में शामिल मोईन के ससुर ने नम आंखों से बताया, “मोईन कपड़ों की दुकान में काम करता था। शायद नमाज पढ़ने दरगाह गया होगा। उसके दो छोटे बच्चे हैं। मेरी बेटी ने फोन पर बताया कि छत गिर गई है, उसकी हालत भी बहुत खराब है।”
ASI के संरक्षण में हुमायूं का मकबरा
हुमायूं का मकबरा दिल्ली का एक मशहूर ऐतिहासिक स्थल है, जिसकी देखरेख भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) करती है। छुट्टियों में यहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं।
इतिहास और वास्तुकला की मिसाल
मुगल सम्राट हुमायूं की याद में उनकी पहली पत्नी बेगा बेगम (हाजी बेगम) ने 1569-70 में इस भव्य स्मारक का निर्माण कराया था। इसे फारसी वास्तुकार मिर्क मिर्जा गियास और उनके बेटे सय्यद मुहम्मद ने डिज़ाइन किया था। यह भारतीय उपमहाद्वीप का पहला बगीचा-मकबरा है, जो लाल बलुआ पत्थर से बनी पहली भव्य इमारत भी है।
यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल
1993 में यूनेस्को ने हुमायूं के मकबरे को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया। इसके बाद यहां बड़े पैमाने पर संरक्षण और जीर्णोद्धार का कार्य हुआ। परिसर में मुख्य मकबरे के अलावा कई छोटे स्मारक हैं, जिनमें ईसा खान नियाज़ी का मकबरा प्रमुख है। ईसा खान, सूरी वंश के शेरशाह सूरी के दरबार में एक प्रमुख अफगान सरदार थे, जिन्होंने 1547 में मुगलों के खिलाफ युद्ध लड़ा था।
यह स्मारक न केवल ऐतिहासिक महत्व रखता है, बल्कि अपनी शानदार मुगल वास्तुकला के लिए भी दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करता है।










