नई दिल्ली। NCERT के सिलेबस बदलाव को लेकर मचे राजनीतिक घमासान में अब AIMIM प्रमुख और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी भी कूद पड़े हैं। ओवैसी ने आरोप लगाया कि जब-जब बीजेपी और आरएसएस सत्ता में आते हैं, तब इतिहास को बदलने की कोशिश की जाती है। उन्होंने कहा कि आजादी और विभाजन से जुड़ी कई सच्चाइयों को किताबों में छिपाया जा रहा है और अपनी विचारधारा को थोपने की कोशिश की जा रही है।
“RSS अंग्रेजों के साथ था”
ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई के समय आरएसएस के लोग अंग्रेजों के साथ खड़े थे, लेकिन आज उनकी तारीफ की जा रही है। ओवैसी ने कहा, “संघ की विचारधारा संविधान के खिलाफ है। उनकी शपथ में एक ही धर्म और एक ही समुदाय की बात होती है।”
उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री जिन नेताओं की तारीफ कर रहे हैं, उनमें श्यामा प्रसाद मुखर्जी भी शामिल हैं, जो 1941 में बंगाल कैबिनेट में मंत्री थे। उस समय फ़ज़लुल हक़ उसका नेतृत्व कर रहे थे, जिन्होंने 1940 के लाहौर अधिवेशन में मुस्लिम लीग का पाकिस्तान प्रस्ताव पेश किया था। ओवैसी ने कहा कि AIMIM हमेशा से भाजपा की विचारधारा का विरोध करती रही है और आगे भी करती रहेगी।
PM से तीखे सवाल
ओवैसी ने प्रधानमंत्री से सवाल किया कि आरएसएस के कार्यालय पर पहली बार तिरंगा कब फहराया गया था? उन्होंने आरोप लगाया कि RSS आज भी नफरत की राजनीति करता है और देश को गुमराह कर रहा है।
चीन-अमेरिका और बिहार चुनाव का जिक्र
ओवैसी ने कहा कि भारत को सबसे बड़ा खतरा चीन से है, जबकि अमेरिका के टैरिफ से भी देश को आर्थिक नुकसान हो रहा है। इसके अलावा उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर भी बयान दिया और कहा कि AIMIM वहां सक्रिय है और पार्टी का प्रचार अभियान तेज किया जा रहा है।









