लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा “वोट चोरी” और प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए आरोपों पर चुनाव आयोग ने सख्त प्रतिक्रिया दी है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने साफ शब्दों में कहा कि केवल पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन दिखाकर और अपुष्ट आंकड़े पेश करके चुनाव आयोग पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
ज्ञानेश कुमार ने कहा, “अगर कोई यह दावा करता है कि किसी महिला ने दो बार मतदान किया, तो इसके लिए सबूत जरूरी हैं। इतने गंभीर विषयों पर बिना शपथ पत्र (हलफनामा) दिए आरोप लगाना उचित नहीं है।”
“सात दिन में हलफनामा दो या माफी मांगो”
सीईसी ने राहुल गांधी को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें या तो सात दिनों के भीतर हलफनामा देना होगा या फिर देश से माफी मांगनी होगी। उन्होंने कहा, “तीसरा कोई विकल्प नहीं है। अगर हलफनामा नहीं दिया गया तो यह माना जाएगा कि लगाए गए सभी आरोप निराधार थे।”
“हर मतदाता के साथ चट्टान की तरह खड़ा है आयोग”
ज्ञानेश कुमार ने आगे कहा कि बिना सबूत किसी भी योग्य मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग हर वैध मतदाता के अधिकार की रक्षा के लिए पूरी मजबूती से खड़ा है।
“SIR का मकसद वोटर लिस्ट को शुद्ध करना”
सीईसी ने बताया कि पिछले 20 सालों से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) नहीं हुआ था। इसका मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को सही और सटीक बनाना है। राजनीतिक दलों की शिकायतों के बाद ही यह प्रक्रिया शुरू की गई है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बिहार में 22 लाख मृत मतदाता पिछले छह महीनों में नहीं, बल्कि कई वर्षों के दौरान मरे हैं। लेकिन उनका नाम रिकॉर्ड से नहीं हटाया गया था। ऐसे में जब पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत की गई और किसी ने चुनाव याचिका तक दायर नहीं की, तो “वोट चोरी” जैसे आरोप उठाना गलत है।










