समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष और कन्नौज सांसद अखिलेश यादव ने सोमवार को भारत निर्वाचन आयोग को कठघरे में खड़ा करते हुए उसे “झूठा” करार दिया। यह बयान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के उस दावे के बाद आया जिसमें उन्होंने विपक्ष द्वारा लगाए गए ‘वोट चोरी’ और अन्य गड़बड़ियों के आरोपों को खारिज कर दिया था।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने मोबाइल पर रसीदें दिखाते हुए कहा, “मैं प्रमाण देना चाहता हूं, ये हमारे पास की रसीदें हैं। अभी चाहें तो आपके लिए इनका प्रिंटआउट भी निकालकर दे सकता हूं।”
बीएलओ और अधिकारियों पर सवाल
अखिलेश ने आयोग से जाति आधारित बीएलओ की नियुक्ति बंद करने की मांग की। उन्होंने कहा– “चुनाव जिस अधिकारी के अधीन होता है, उसमें एक भी PDA का अधिकारी शामिल है तो बता दीजिए। जबसे बीजेपी सत्ता में आई है, क्या किसी शिकायत पर एक भी अधिकारी हटाया गया है? इसका मतलब साफ है कि चुनाव आयोग बीजेपी के निर्देशों पर काम कर रहा है।”
उन्होंने आगे कहा कि वोट बनवाने की प्रक्रिया के साथ-साथ वोट कटवाने की भी पूरी व्यवस्था है। “अगर सिर्फ एक जिलाधिकारी को सस्पेंड कर दिया जाए तो देशभर में एक भी वोट नहीं कटेगा। लेकिन सच्चाई यह है कि जानबूझकर पिछड़े वर्गों – बिंद, मौर्य, पाल, राठौर – के वोट काटे जा रहे हैं और दिखाया जाता है कि पिछड़े बीजेपी को वोट दे रहे हैं।”
“भाजपा जाए तो सच्चाई आए”
अखिलेश यादव ने रविवार को भी आयोग पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि यूपी में सपा द्वारा दिए गए शपथपत्र आयोग तक नहीं पहुंचे, यह दावा गलत है। इसके सबूत के तौर पर उन्होंने डाक विभाग की रसीदें और डिजिटल रिसीट दिखाई और सवाल किया – “अगर यह डिजिटल रसीद फर्जी है तो ‘डिजिटल इंडिया’ भी शक के घेरे में आ जाएगा।”
सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि 2019, 2022 और 2024 के चुनावों में एक भी अधिकारी कार्रवाई का सामना नहीं करता दिखा, जबकि सपा ने ‘वोट डकैती’ पर 18 हजार शपथपत्र जमा किए थे, लेकिन नतीजा हमेशा शून्य रहा।










