बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने दावा किया है कि उन्हें बदनाम करने के लिए विदेशी ताकतें सक्रिय हैं। उनका कहना है कि AI तकनीक का दुरुपयोग करते हुए फर्जी वीडियो बनाए जा रहे हैं, ताकि उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रचा गया षड्यंत्र है।
“जातिवाद सबसे बड़ी चुनौती, चाहिए राष्ट्रवाद”
धीरेंद्र शास्त्री ने समाज में बढ़ते जातिवाद पर चिंता जताते हुए कहा, “आज देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती जातिवाद है, जो समाज को तोड़ने का काम कर रहा है।” उन्होंने आगे कहा कि उनका उद्देश्य कास्टिज्म नहीं, बल्कि राष्ट्रिज्म (राष्ट्रवाद) को बढ़ावा देना है।
उनकी यात्रा का मुख्य संदेश है, सामाजिक समरसता, हिंदू एकता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण।
“हमें संविधान में नहीं, दिलों में चाहिए हिंदू राष्ट्र”
शास्त्री ने साफ किया कि उनका यह अभियान किसी भी प्रकार का राजनीतिक आंदोलन नहीं है। उन्होंने कहा, “हमें किसी सरकार या संविधान में हिंदू राष्ट्र की मुहर नहीं चाहिए। हमारा लक्ष्य ऐसा हिंदू राष्ट्र बनाना है जो हर नागरिक के दिल में बसता हो, हमें कागजों पर नहीं, विचारों में हिंदू राष्ट्र चाहिए।”
पर्यावरण और संस्कृति पर विशेष जोर
अपनी यात्रा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री पर्यावरण संरक्षण और नदी स्वच्छता पर भी लोगों को जागरूक करेंगे। विशेष रूप से यमुना नदी की शुद्धता को लेकर जनजागरण अभियान चलाया जाएगा।
यात्रा मार्ग में वे संतों, समाजसेवियों और युवाओं से संवाद करेंगे, जहां सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव जैसे विषयों पर चर्चा होगी।
“हिंदुओं के लिए भी हो एक राष्ट्र”
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि जैसे मुसलमानों के 65 से अधिक देश और ईसाइयों के 95 से अधिक देश हैं, वैसे ही दुनिया के करोड़ों हिंदुओं के लिए भी एक राष्ट्र होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका प्रस्तावित हिंदू राष्ट्र किसी धर्म के प्रति भेदभावपूर्ण नहीं, बल्कि सांस्कृतिक रूप से समावेशी और मूल्यों पर आधारित होगा।
“नई पीढ़ी को बचानी होगी अपनी जड़ें”
उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति, परंपराएं और आध्यात्मिक विरासत को संजोने की जिम्मेदारी अब नई पीढ़ी पर है।
उनके अनुसार, “अगर आने वाली पीढ़ियां, अल्फा, बीटा और आगे की जनरेशन अपनी जड़ों से कट गईं, तो हमारी पहचान मिट जाएगी।”
इस दौरान उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने धर्म, संस्कृति और पर्यावरण की रक्षा को अपना कर्तव्य समझें, क्योंकि यही भारत की आत्मा है।










