पटना I बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए ने रिकॉर्ड तोड़ जीत दर्ज की है। 243 सीटों में से 202 सीटों पर कब्जा कर एनडीए ने जहां अपना परचम लहराया, वहीं महागठबंधन सिर्फ 35 सीटों पर सिमट गया। इस ऐतिहासिक जीत के अगले ही दिन भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल नेताओं पर सख्त कदम उठाते हुए ‘सफाई अभियान’ शुरू कर दिया है।
बीजेपी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और आरा के सांसद आर.के. सिंह सहित तीन नेताओं को छह साल के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया है। निलंबित नेताओं में अशोक अग्रवाल और उषा अग्रवाल के नाम भी शामिल हैं। पार्टी का कहना है कि यह कार्रवाई संगठन की एकता और अनुशासन को बनाए रखने के लिए की गई है।
पार्टी की छवि को हुआ नुकसान, इसलिए उठाया बड़ा कदम
बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता के मुताबिक, चुनाव के दौरान इन नेताओं के बयानों और गतिविधियों से एनडीए की छवि को नुकसान पहुंचा था। आर.के. सिंह को पूर्ण रूप से पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है, जबकि अन्य दो नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। पार्टी ने साफ किया कि किसी भी नेता की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी, चाहे वह कितना ही वरिष्ठ क्यों न हो।
विवादित बयानों से बढ़ी थी पार्टी की परेशानी
आर.के. सिंह हाल के दिनों में लगातार विवादित बयानों की वजह से चर्चा में थे। 2013 में बीजेपी में शामिल होने के बाद उन्होंने केंद्र में ऊर्जा मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान उनके कई बयानों ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी।
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उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार पर 62 हजार करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया।
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उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को “हत्यारा” बताते हुए लोगों से तारापुर विधानसभा क्षेत्र में उन्हें वोट न देने की अपील की।
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इसके अलावा, उन्होंने एनडीए द्वारा अनंत सिंह और विभा देवी जैसे विवादित चेहरों को टिकट दिए जाने पर भी सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए।
बीजेपी का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों और बयानबाजी ने चुनाव के समय पार्टी और सहयोगी जेडीयू की छवि को नुकसान पहुंचाया, जिसके चलते यह कड़ा कदम उठाया गया।










