मुंबई I भारतीय रुपया शुक्रवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में ऐतिहासिक गिरावट का सामना करते हुए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 89.50 तक टूट गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है।
दिन की शुरुआत में रुपया 88.67 पर खुला था, लेकिन कारोबारी सत्र में यह लगातार दबाव में रहा और 82 पैसे की भारी गिरावट के साथ 89.50 तक फिसल गया। बाजार बंद होते-होते यह थोड़ा संभला और 89.40 पर ट्रेड करता दिखा, जो पिछले सत्र से 72 पैसे कमजोर है।
गुरुवार को ही रुपये में 20 पैसे की गिरावट दर्ज की गई थी, जिससे दो दिनों में कुल 82 पैसे से अधिक की कमजोरी देखने को मिली है।
गिरावट की वजह क्या है?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, रुपये पर दबाव बढ़ने के पीछे कई प्रमुख कारण हैं—
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अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
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विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली
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वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती
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आयातकों की भारी डॉलर डिमांड
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और मजबूत अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों से बढ़ा डॉलर इंडेक्स
इन सभी कारणों ने मिलकर रुपये को नीचे धकेल दिया।
क्या रुपया 90 के पार जाएगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मौजूदा दबाव जारी रहा, तो रुपया जल्द ही 90 रुपये प्रति डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर को भी पार कर सकता है। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक बाजार में समय-समय पर हस्तक्षेप कर रहा है, लेकिन भारी डॉलर निकासी और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों की वजह से रुपये को थामना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
रुपये में यह लगातार गिरावट भारत की अर्थव्यवस्था, आयात बिल और महंगाई पर आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है।










