वाराणसी: वन्यजीव तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए जीआरपी और सीआईबी की संयुक्त टीम ने रविवार को आसनसोल एक्सप्रेस से 363 जीवित कछुओं को बरामद किया है। इस मामले में पांच तस्करों को गिरफ्तार किया गया है, जो कछुओं को वाराणसी से पश्चिम बंगाल ले जाने की फिराक में थे। बरामद कछुओं की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 72 लाख रुपये बताई जा रही है।
मौनी अमावस्या को देखते हुए रेलवे स्टेशन पर सघन जांच अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान आसनसोल एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे पांच संदिग्ध यात्रियों पर पुलिस की नजर पड़ी। तलाशी लेने पर उनके पास मौजूद 13 बैगों से बड़ी संख्या में जीवित कछुए मिले, जिसके बाद सभी आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया।
जीआरपी इंस्पेक्टर राजोल नागर के अनुसार, गिरफ्तार किए गए सभी तस्कर सुल्तानपुर जिले के रहने वाले हैं। प्रारंभिक पूछताछ में खुलासा हुआ है कि कछुओं को पश्चिम बंगाल पहुंचाने की योजना थी, जहां इनकी मांग अधिक रहती है। कछुओं का इस्तेमाल मांस, दवाइयों, तांत्रिक क्रियाओं और अंधविश्वास से जुड़े कार्यों में किया जाता है।
सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने बताया कि कछुआ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत अत्यंत संरक्षित प्रजाति में शामिल है और इसका अवैध व्यापार गंभीर अपराध है। डिप्टी रेंजर राजकुमार गौतम ने बताया कि तस्करों को एक कछुए के बदले 20 से 25 हजार रुपये तक की कमाई होती है।
बरामद सभी कछुओं की पशु चिकित्साधिकारी से स्वास्थ्य जांच कराई जाएगी। इसके बाद न्यायालय के निर्देशानुसार उन्हें प्राकृतिक संरक्षण के तहत गंगा नदी, तालाब या झीलों में सुरक्षित रूप से छोड़ा जाएगा। फिलहाल आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है और उनके आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।










