सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: स्कूलों में छात्राओं को मुफ्त सैनेटरी पैड अनिवार्य, नियम न मानने पर रद्द होगी मान्यता 

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को देशभर के स्कूलों के लिए एक अहम और दूरगामी फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों में कक्षा 6 से 12 तक पढ़ने वाली छात्राओं को मुफ्त में बायोडिग्रेडेबल सैनेटरी पैड उपलब्ध कराएं। अदालत ने साफ कहा कि मासिक धर्म स्वास्थ्य महिलाओं के सम्मान और गरिमापूर्ण जीवन से जुड़ा विषय है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार का हिस्सा है।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने केंद्र सरकार की ‘स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए मासिक धर्म स्वच्छता नीति’ को पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि यदि स्कूलों में शौचालय, स्वच्छता और सैनेटरी पैड की व्यवस्था नहीं की गई, तो इसके लिए संबंधित राज्य सरकारों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।

निजी स्कूलों को कड़ी चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने निजी स्कूलों पर सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी कि यदि वे छात्राओं को सैनेटरी पैड उपलब्ध कराने और लड़के-लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय सुनिश्चित करने में नाकाम रहते हैं, तो उनकी मान्यता रद्द की जा सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह नियम सरकारी ही नहीं, बल्कि निजी स्कूलों पर भी समान रूप से लागू होगा।

दिव्यांग-अनुकूल शौचालय भी जरूरी

कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी स्कूलों में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय हों, साथ ही दिव्यांग छात्राओं के लिए विशेष रूप से अनुकूल शौचालयों की व्यवस्था की जाए। शौचालयों में पानी, साबुन और नियमित सफाई सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।

यह फैसला सामाजिक कार्यकर्ता जया ठाकुर की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद आया है, जिसमें स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए मुफ्त सैनेटरी पैड और बेहतर स्वच्छता सुविधाओं की मांग की गई थी। कोर्ट ने 10 दिसंबर 2024 को इस मामले में फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे अब लागू करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

News Rastra
Author: News Rastra

Leave a Comment

और पढ़ें