नई दिल्ली। 1 फरवरी 2026 जैसे-जैसे करीब आ रहा है, वैसे-वैसे करोड़ों होम लोन धारकों और मध्यम वर्ग की नजरें केंद्रीय बजट पर टिकी हुई हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना नौवां बजट पेश करने जा रही हैं और इस बार लोगों को सबसे ज्यादा उम्मीद होम लोन, टैक्स डिडक्शन और EMI में राहत को लेकर है।
बीते कुछ वर्षों में प्रॉपर्टी की कीमतों में तेज उछाल और ऊंची ब्याज दरों ने आम आदमी के लिए घर खरीदना मुश्किल बना दिया है। ऐसे में सवाल यही है कि क्या बजट 2026 मिडिल क्लास के लिए अपने घर का सपना थोड़ा आसान बना पाएगा?
होम लोन ब्याज पर टैक्स छूट बढ़ाने की मांग
वर्तमान में आयकर अधिनियम की धारा 24(b) के तहत होम लोन के ब्याज पर अधिकतम 2 लाख रुपये तक की टैक्स छूट मिलती है। यह सीमा साल 2014-15 से अब तक नहीं बदली गई है। रियल एस्टेट से जुड़े संगठनों का कहना है कि पिछले दस वर्षों में घरों की कीमतें लगभग दोगुनी हो चुकी हैं, ऐसे में ब्याज पर मिलने वाली टैक्स छूट को बढ़ाकर 4 से 5 लाख रुपये किया जाना चाहिए।
EMI पर क्या होगा असर?
हालांकि बजट सीधे तौर पर बैंक की ब्याज दरें तय नहीं करता, लेकिन टैक्स में राहत और हाउसिंग से जुड़े फैसलों का असर आम आदमी की EMI पर जरूर पड़ता है। अगर अफोर्डेबल हाउसिंग की मौजूदा सीमा 45 लाख रुपये से बढ़ाकर 65 से 75 लाख रुपये की जाती है, तो ज्यादा लोग सस्ते होम लोन और सरकारी सब्सिडी का फायदा उठा सकेंगे। इसके अलावा टैक्स डिडक्शन बढ़ने से होम लोन धारकों की टैक्स बचत बढ़ेगी, जिससे EMI का वास्तविक बोझ कम होगा।
सेक्शन 80C में बदलाव की जरूरत
होम लोन के मूलधन पर सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की छूट मिलती है, लेकिन इसी सीमा में PPF, LIC और बच्चों की पढ़ाई की फीस भी शामिल होती है। मिडिल क्लास की मांग है कि होम लोन के प्रिंसिपल के लिए अलग टैक्स सेक्शन बनाया जाए, ताकि घर खरीदने वालों को वास्तविक राहत मिल सके।
नई टैक्स व्यवस्था पर सबसे ज्यादा उम्मीदें
नई टैक्स व्यवस्था में फिलहाल होम लोन के ब्याज पर कोई टैक्स छूट नहीं दी जाती। ऐसे में लोगों को उम्मीद है कि बजट 2026 में सरकार न्यू टैक्स रिजीम के तहत भी होम लोन और इंश्योरेंस पर टैक्स डिडक्शन की सुविधा शुरू कर सकती है।
अब सबकी निगाहें 1 फरवरी पर टिकी हैं। इसी दिन साफ होगा कि सरकार मिडिल क्लास के सपनों के घर को कितना सस्ता बनाने का फैसला करती है।










