महाराष्ट्र। महाराष्ट्र की राजनीति में एक अनोखा घटनाक्रम सामने आया है। भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका में मेयर पद के चुनाव को लेकर दो पारंपरिक विरोधी दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी एक साथ नजर आ रहे हैं।
बीजेपी उम्मीदवार को कांग्रेस का समर्थन
जानकारी के मुताबिक, मेयर पद के लिए बीजेपी उम्मीदवार को कांग्रेस ने आधिकारिक पत्र जारी कर समर्थन दिया है। बीजेपी ने पहले नारायण चौधरी को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन बाद में स्नेहा पाटील का नाम आगे किया गया। पार्टी का कहना है कि वह “सेक्युलर उम्मीदवार” के साथ आगे बढ़ रही है।
इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। लोकसभा सांसद अनिल देसाई ने इस गठजोड़ को आश्चर्यजनक करार दिया।
क्या शिंदे गुट के खिलाफ रणनीति?
सियासी गलियारों में चर्चा है कि क्या यह कदम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को भिवंडी की सत्ता से दूर रखने की रणनीति है? शिंदे गुट की शिवसेना महायुति का हिस्सा है और राज्य में बीजेपी के साथ सत्ता में है। हालांकि स्थानीय निकाय चुनावों में समीकरण अक्सर बदल जाते हैं। कहीं सहयोगी प्रतिद्वंद्वी बन जाते हैं, तो कहीं विरोधी साथ आ जाते हैं।
चुनाव परिणाम क्या रहे?
गौरतलब है कि 15 जनवरी को महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव हुए थे और 16 जनवरी को नतीजे घोषित किए गए। भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला।
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कांग्रेस: 30 सीटें
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बीजेपी: 22 सीटें
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शिवसेना (शिंदे गुट): 12 सीटें
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एनसीपी-एसपी (शरद पवार गुट): 12 सीटें
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समाजवादी पार्टी: 6 सीटें
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कोनार्क विकास अघाड़ी: 4 सीटें
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भिवंडी विकास अघाड़ी: 3 सीटें
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1 निर्दलीय उम्मीदवार विजयी
ऐसे में मेयर पद के लिए समर्थन और समीकरणों का महत्व बढ़ गया है। कांग्रेस का बीजेपी उम्मीदवार को समर्थन देना राज्य की राजनीति में नए संकेत दे रहा है। अब देखना होगा कि यह अस्थायी रणनीति है या आगे चलकर बड़े राजनीतिक बदलाव की भूमिका तैयार कर रही है।










