2017 में म्यांमार यात्रा के बाद यह उनका पहला विदेशी दौरा है, जिसे प्रदेश की निवेश कूटनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
निवेशकों से सीधा संवाद
दौरे के दौरान मुख्यमंत्री जी-टू-बी (गवर्नमेंट टू बिजनेस) बैठकों और राउंड टेबल मीटिंग के जरिए निवेशकों से सीधे संवाद करेंगे। प्रदेश की औद्योगिक नीति, भूमि बैंक, एक्सप्रेसवे नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स और कौशल विकास जैसे मुद्दों पर प्रस्तुति दी जाएगी।
सरकार का मानना है कि 25 करोड़ की आबादी, विशाल श्रमबल और तेजी से विकसित हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर उत्तर प्रदेश को उत्पादन और उपभोग का बड़ा केंद्र बनाता है।
सिंगापुर में 25 कंपनियों से मुलाकात
सिंगापुर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री 25 कंपनियों के प्रतिनिधियों से मिलेंगे। इसमें Google और ST Telemedia Global Data Centres के साथ डेटा सेंटर निवेश, जापफा ग्रुप और ओलम इंटरनेशनल के साथ एग्रीबिजनेस, मैपलट्री के साथ लॉजिस्टिक्स तथा सेम्बकॉर्प के साथ औद्योगिक पार्क सहयोग पर चर्चा होगी।
इसके अलावा टेमासेक, जीआईसी और ब्लैकस्टोन जैसे वैश्विक निवेश फंड्स से पूंजी निवेश और फिनटेक-स्टार्टअप सहयोग पर भी बातचीत होगी।
जापान में ऑटो और सेमीकंडक्टर पर फोकस
जापान में मुख्यमंत्री आठ प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों से मिलेंगे। इसमें Suzuki और कुबोटा के साथ ऑटोमोबाइल निवेश, Tokyo Electron के साथ सेमीकंडक्टर, तोशिबा के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और अन्य कंपनियों के साथ सप्लाई चेन सहयोग पर चर्चा होगी। ग्रीन हाइड्रोजन और रियल एस्टेट निवेश भी एजेंडे में शामिल हैं।
‘वन ट्रिलियन डॉलर’ अर्थव्यवस्था की ओर कदम
मुख्यमंत्री इस दौरे में ‘नए उत्तर प्रदेश’ की तस्वीर वैश्विक मंच पर रखेंगे, जहां मजबूत कानून व्यवस्था, नीति स्थिरता और बेहतर कनेक्टिविटी निवेश के लिए अनुकूल माहौल प्रदान कर रही है।
सरकार को उम्मीद है कि यह यात्रा प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ाने और ‘ब्रांड यूपी’ को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाएगी।










