वाराणसी। यूपी बोर्ड 2026 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं 12 मार्च को समाप्त हो रही हैं। इसके साथ ही अब उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। प्रदेशभर में 18 मार्च से कॉपियों की जांच शुरू होगी, जो 1 अप्रैल तक चलेगी। इस दौरान पूरे प्रदेश में 249 मूल्यांकन केंद्र बनाए गए हैं, जबकि वाराणसी में चार केंद्रों पर कॉपियों की जांच की जाएगी।
वाराणसी में मूल्यांकन के लिए पीएम श्री राजकीय क्वींस इंटर कॉलेज, निवेदिता शिक्षा सदन बालिका इंटर कॉलेज, भारतीय शिक्षा मंदिर इंटर कॉलेज और जेपी मेहता इंटर कॉलेज को केंद्र बनाया गया है। इन केंद्रों पर 2500 से अधिक परीक्षकों की ड्यूटी लगाई जाएगी। पूरी मूल्यांकन प्रक्रिया CCTV कैमरों की निगरानी में कराई जाएगी।
जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) भोलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि 18 मार्च से मूल्यांकन कार्य शुरू होकर 1 अप्रैल तक पूरा किया जाएगा। निर्धारित समय सीमा के भीतर कॉपियों की जांच पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए हर केंद्र पर पर्यवेक्षक तैनात रहेंगे।
मोबाइल फोन ले जाने पर रहेगी रोक
उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षा के लिए मजबूत कक्षों में भंडारण की व्यवस्था की गई है। मूल्यांकन केंद्रों पर बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर भी पूरी तरह रोक रहेगी। यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने स्पष्ट किया है कि मूल्यांकन के दौरान मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट या अन्य प्रतिबंधित सामग्री अंदर ले जाने की अनुमति नहीं होगी।
परीक्षकों को निर्धारित दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करना होगा और मूल्यांकन कार्य की दैनिक प्रगति रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जाएगी। किसी भी तरह की लापरवाही से बचने के लिए वरिष्ठ अधिकारी समय-समय पर औचक निरीक्षण भी करेंगे।
12वीं के छात्रों को पहली बार मिलेगा इंप्रूवमेंट एग्जाम का मौका
माध्यमिक शिक्षा परिषद ने इंटरमीडिएट के छात्रों के लिए इस बार एक नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी की है। इसके तहत 12वीं के छात्र पांच विषयों में से किसी एक विषय में अंक सुधार के लिए इंप्रूवमेंट परीक्षा दे सकेंगे।
अप्रैल के अंत में परिणाम घोषित होने के बाद इसके लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अभी तक इंटरमीडिएट स्तर पर केवल कंपार्टमेंट परीक्षा की व्यवस्था थी, जिसमें किसी एक विषय में फेल होने पर छात्र को दोबारा परीक्षा देने का मौका मिलता था।
हालांकि कई बार छात्र पास तो हो जाते हैं, लेकिन किसी एक विषय में कम अंक आने से उनका कुल प्रतिशत प्रभावित हो जाता है, जिससे उच्च शिक्षा में प्रवेश और प्रतियोगी परीक्षाओं की मेरिट पर असर पड़ता है। इसी समस्या को देखते हुए बोर्ड ने पहली बार इंप्रूवमेंट परीक्षा की पहल की है।










