लोकसभा में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज, अमित शाह ने राहुल गांधी के आरोपों पर किया पलटवार

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

नई दिल्ली। लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनि मत से खारिज हो गया। इस दौरान सदन में बहस के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चीन और संसद में बोलने के मुद्दे को लेकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी।

अमित शाह ने बिना नाम लिए राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि जब डोकलाम के समय भारत और चीन की सेनाएं आमने-सामने थीं, तब विपक्ष के नेता चीन के दूतावास में गुप्त बैठक कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय विपक्ष के रक्षा मंत्री ने संसद में कहा था कि अगर सीमा पर सड़क बनाई जाएगी तो दुश्मन देश के अंदर आ जाएगा।

कांग्रेस पर साधा निशाना

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में अक्साई चीन भारत से छिन गया था। उन्होंने कहा कि उस समय प्रधानमंत्री रहे जवाहरलाल नेहरू ने इस पर जवाब दिया था कि वहां घास का तिनका भी नहीं उगता।

अमित शाह ने आगे आरोप लगाया कि वर्ष 2005-06 में राजीव गांधी फाउंडेशन को चीनी दूतावास से 1 करोड़ 35 लाख रुपये का दान मिला था। उन्होंने कहा कि इस मामले में एफसीआरए लाइसेंस भी रद्द किया गया था। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस से चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ हुए एमओयू के बारे में स्पष्ट जानकारी देने की मांग की।

बोलने के समय विदेश चले जाते हैं

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा सदन में बोलने का मौका नहीं मिलने के आरोप पर गृह मंत्री ने कहा कि जब बोलने का समय होता है तब वे विदेश में रहते हैं। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 17वीं लोकसभा में कांग्रेस के 52 सदस्यों को 157 घंटे 55 मिनट का समय दिया गया, जबकि भाजपा के 303 सांसदों को 349 घंटे 8 मिनट का समय मिला।

अमित शाह ने बताया कि 18वीं लोकसभा में अब तक कांग्रेस के 99 सांसदों को 71 घंटे का समय मिला है, जबकि भाजपा के 239 सांसदों को 122 घंटे का समय मिला है। उन्होंने कहा कि इस हिसाब से कांग्रेस को भाजपा के मुकाबले दोगुना समय मिला, फिर भी यह कहना कि उन्हें बोलने नहीं दिया जाता, सही नहीं है।

स्पीकर की निष्ठा पर उठे सवाल

गृह मंत्री ने कहा कि जब स्पीकर का चयन हुआ था, तब पक्ष और विपक्ष दोनों के नेताओं ने मिलकर उन्हें आसन तक पहुंचाया था। इसका मतलब है कि दोनों पक्षों को स्पीकर के निर्णयों का सम्मान करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि लोकसभा के नियमों के अनुसार स्पीकर के फैसले को अंतिम माना जाता है। हालांकि किसी निर्णय पर असहमति व्यक्त की जा सकती है, लेकिन विपक्ष द्वारा स्पीकर की निष्ठा पर सवाल उठाना उचित नहीं है।

News Rastra
Author: News Rastra

Leave a Comment

और पढ़ें