प्रयागराज: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य Swami Avimukteshwaranand Saraswati को यौन उत्पीड़न के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने बुधवार को उन्हें अग्रिम जमानत प्रदान कर दी। उनके साथ उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी को भी राहत मिली है।
यह फैसला न्यायमूर्ति Jitendra Kumar Sinha की एकल पीठ ने सुनाया।
असत्य की हार हमेशा होती है– अविमुक्तेश्वरानंद
जमानत मिलने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि वे अपने धार्मिक कार्यों में पहले की तरह लगे रहेंगे। उन्होंने कहा,
“हम अपने धर्म के कार्य और गौ-माता की रक्षा के अभियान को आगे बढ़ाते रहेंगे।”
मठ के माहौल पर उन्होंने बताया कि वहां उत्साह का माहौल है। हमारे बटुकों ने बाजा बजाकर और जयकारे लगाकर खुशी जाहिर की,” उन्होंने कहा।
विरोधियों को लेकर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने स्पष्ट कहा, विरोधियों की बात मत करिए, यह असत्य की हार है। सत्य हमेशा जीतता है।”
हालांकि, मामले की कानूनी प्रक्रिया पर उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
हाई कोर्ट का निर्देश: मीडिया से दूरी बनाए रखें
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जमानत देते हुए एक अहम निर्देश भी जारी किया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और याचिकाकर्ताओं दोनों को इस मामले में मीडिया के सामने कोई बयान न देने को कहा है।
पहले गिरफ्तारी पर लग चुकी थी रोक
इससे पहले भी अदालत ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। अदालत ने कहा था कि अगली सुनवाई तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि प्रयागराज में पॉक्सो (POCSO) अदालत के निर्देश पर झूंसी थाने में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
इस मामले में कई शिष्यों द्वारा यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अदालत ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं को पुलिस जांच में सहयोग करने का भी निर्देश दिया था।
आगे क्या?
फिलहाल इस मामले में अग्रिम जमानत मिलने से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को राहत जरूर मिली है, लेकिन जांच जारी है। आने वाले समय में पुलिस की रिपोर्ट और अदालत की अगली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।










