ममता बनर्जी को बड़ा झटका! शत्रुघ्न सिन्हा, यूसुफ पठान समेत 19 बागी सांसदों के नाम आए सामने

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी सियासी घमासान अब और तेज हो गया है। पार्टी से असंतुष्ट बताए जा रहे 19 सांसदों के नाम सामने आए हैं, जिन्होंने कथित तौर पर लोकसभा अध्यक्ष को लिखे गए एक पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।

बागी सांसदों की सूची में काकोली घोष दस्तीदार, जगदीश चंद्र बसूनिया, खलीलुर रहमान, यूसुफ पठान, अबू ताहिर खान, पार्थ भौमिक, बापी हलदर, सयानी घोष, मिताली बेग, दीपक अधिकारी, कालिपदा सोरेन, जून मालिया, अरूप चक्रवर्ती, डॉ. शर्मिला सरकार, शत्रुघ्न सिन्हा, आसित कुमार मल, शताब्दी रॉय और रचना बनर्जी जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं।

बागी गुट ने किया बड़ा दावा

बागी सांसदों के गुट का दावा है कि वे लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने की घोषणा करने की तैयारी में हैं। गुट की नेता काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि उनके साथ करीब 20 सांसद हैं।

इस घटनाक्रम के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में संभावित नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

TMC नेताओं का पलटवार

उधर, तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला है। पार्टी सांसद कल्याण बनर्जी और कीर्ति आजाद ने असंतुष्ट नेताओं की राजनीतिक नैतिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि वे वास्तव में पार्टी छोड़ना चाहते हैं तो खुलकर अपना रुख स्पष्ट करें।

कल्याण बनर्जी ने कहा कि अगर बागी सांसदों के पास उतना समर्थन है, जितना वे दावा कर रहे हैं, तो उन्हें औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल हो जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा उन्हें स्वीकार नहीं करेगी।

पत्र की प्रामाणिकता पर उठाए सवाल

टीएमसी नेताओं ने बागी गुट द्वारा जारी किए गए कथित पत्र की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि यदि ऐसा कोई महत्वपूर्ण पत्र मौजूद है तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया।

पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि बागी सांसद भाजपा नेताओं के संपर्क में हैं और हाल ही में उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात भी की है।

“ममता नहीं, मोदी को बना लिया नेता”

कल्याण बनर्जी ने कहा कि बागी सांसदों ने अपना राजनीतिक नेतृत्व बदल लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो नेता कभी ममता बनर्जी के नेतृत्व में राजनीति करते थे, वे अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना नेता मान रहे हैं।

उन्होंने बागी सांसदों को चुनौती देते हुए कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता का सामना करें।

TMC ने जताया भरोसा

टीएमसी नेताओं ने दावा किया कि इन घटनाओं का पार्टी पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। उनका कहना है कि पार्टी का नेतृत्व अब भी ममता बनर्जी के हाथों में मजबूत है और कार्यकर्ता पूरी मजबूती से उनके साथ खड़े हैं।

कीर्ति आजाद ने भी बागी सांसदों के रुख को पार्टी के साथ विश्वासघात बताते हुए कहा कि अगर वे भाजपा में जाना चाहते हैं तो उन्हें खुलकर इसकी घोषणा करनी चाहिए।

फिलहाल, पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस घटनाक्रम को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है और आने वाले दिनों में इसके बड़े राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।

News Rastra
Author: News Rastra

Leave a Comment

और पढ़ें