मुंबई। अमेरिका और ईरान के बीच प्रारंभिक शांति समझौते तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की दिशा में बनी सहमति के बाद वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। इस घटनाक्रम का असर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है।
ब्रेंट क्रूड और WTI क्रूड की कीमतों में 4 से 5 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे तेल आयात करने वाले देशों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
शेयर बाजार में लौटी रौनक
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बाद वैश्विक और घरेलू शेयर बाजारों में सकारात्मक माहौल देखने को मिला। निवेशकों ने बैंकिंग, आईटी, मेटल और ऑयल-गैस सेक्टर के शेयरों में खरीदारी बढ़ाई, जिससे बाजार में मजबूती दर्ज की गई।
पेट्रोल-डीजल पर कब मिलेगी राहत?
हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता हुआ है, लेकिन भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। तेल विपणन कंपनियों ने मौजूदा दरों को बरकरार रखा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें अगले कुछ सप्ताह तक इसी स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में ईंधन कीमतों की समीक्षा के दौरान राहत मिल सकती है। हालांकि कीमतों में कटौती का फैसला तेल कंपनियों और सरकारी नीतियों पर भी निर्भर करेगा।
LPG उपभोक्ताओं को भी राहत की उम्मीद
कच्चे तेल और अंतरराष्ट्रीय एलपीजी बाजार में नरमी का असर घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों पर भी पड़ सकता है। जानकारों का मानना है कि यदि वैश्विक कीमतों में गिरावट का रुख जारी रहता है, तो आने वाले महीनों में रसोई गैस के दामों में भी कमी देखने को मिल सकती है।
महंगाई पर पड़ेगा सकारात्मक असर
विशेषज्ञों के अनुसार तेल कीमतों में कमी का सबसे बड़ा फायदा परिवहन लागत घटने के रूप में सामने आता है। ट्रांसपोर्ट सस्ता होने पर खाद्य पदार्थों, उपभोक्ता वस्तुओं और रोजमर्रा के सामान की लागत भी धीरे-धीरे कम हो सकती है। इससे महंगाई दर पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है।
अभी भी बनी हुई हैं चुनौतियां
हालांकि बाजारों में राहत का माहौल है, लेकिन स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। अमेरिका-ईरान समझौते के अंतिम स्वरूप, होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य गतिविधियों की बहाली, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक सप्लाई चेन की स्थिति जैसे कई कारक आगे तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं।
फिलहाल इतना तय है कि शांति समझौते की खबर ने वैश्विक बाजारों को राहत दी है और आम लोगों के बीच पेट्रोल, डीजल तथा एलपीजी की कीमतों में संभावित कटौती की उम्मीदें बढ़ा दी हैं।









