लखनऊ/रामपुर: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को करीब 23 महीने बाद आखिरकार जेल से रिहाई मिल गई। सीतापुर जेल से बाहर निकलते समय वह सीधे कार में सवार हो गए और वहां मौजूद समर्थकों का हाथ हिलाकर अभिवादन किया।
मंगलवार सुबह 9 बजे उनकी रिहाई तय थी, लेकिन बेल बॉन्ड में पते की गलती के चलते कागजी प्रक्रिया अटक गई। अंततः दोपहर बाद सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें रिहा किया गया।
दर्जनों केसों में फंसे थे आजम
रामपुर पुलिस के अनुसार, आजम खान पर कुल 81 मामले दर्ज थे। इनमें जमीन कब्जाने, धोखाधड़ी से लेकर बकरी चोरी तक के आरोप शामिल थे। ये अधिकांश मुकदमे साल 2017 में भाजपा सरकार आने के बाद दर्ज हुए।
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जमीन कब्जा मामला: एक किसान से धोखाधड़ी कर जमीन हथियाने और उसे मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय में मिलाने का आरोप।
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नकली जन्म प्रमाण पत्र: बेटे के दो जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के मामले में आजम, उनकी पत्नी और बेटे को दोषी ठहराया गया।
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हमला और तोड़फोड़: 2016 में घर में घुसकर हमला और तोड़फोड़ करने पर अदालत ने आजम को 7 साल की सजा और 8 लाख रुपये का जुर्माना सुनाया।
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बकरी चोरी केस: 2019 में आरोप लगा कि उन्होंने एक शख्स का घर तुड़वाया और उसकी बकरियां व मवेशी जब्त कर लिए।
जेल से बाहर आते ही दिखा उत्साह
आजम खान की रिहाई के दौरान जेल के बाहर भारी संख्या में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे। जैसे ही वे गाड़ी में बैठे और बाहर निकले, लोगों ने नारे लगाकर उनका स्वागत किया।










