वाराणसी। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री रविवार को वाराणसी पहुंचे। यहां उन्होंने मठ में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात की। शंकराचार्य उस समय मौनव्रत पर थे, ऐसे में दोनों के बीच इशारों में संवाद हुआ। अलंकार ने अपनी आगे की रणनीति शंकराचार्य को बताई, जिसे वे शांत भाव से सुनते रहे।
दैनिक भास्कर से बातचीत में अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि उन्होंने हाल ही में यूजीसी रेगुलेशन और शंकराचार्य के समर्थन में अपने पद से इस्तीफा दिया है। यह कदम उन्होंने संवैधानिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के तहत उठाया। उन्होंने बताया कि अब एससी-एसटी से जुड़े मुद्दों को लेकर अगली लड़ाई दिल्ली में लड़ी जाएगी और 6 फरवरी को वे दिल्ली पहुंचेंगे।
यूजीसी रेगुलेशन पर तीखा हमला
यूजीसी रेगुलेशन 2026 को लेकर अलंकार ने इसे “घृणित और विभाजनकारी मानसिकता का परिणाम” बताया। उनका आरोप है कि इस नियम के जरिए ओबीसी और जनरल वर्ग को आपस में बांटने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि देश की जनता सरकार की मंशा समझ चुकी है और पहली बार सरकार के कोर वोटर भी इससे अलग होते दिख रहे हैं।
सरकार पर गंभीर आरोप
अलंकार अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार पर तीखे शब्दों में हमला बोलते हुए कहा कि देश में वास्तविक रूप से बीजेपी की सरकार नहीं, बल्कि “ईस्ट इंडिया कंपनी मॉडल” पर शासन चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र का उद्देश्य राज्यों के बजट का हिस्सा ठेकेदारी सिस्टम के जरिए निकालकर चुनिंदा कंपनियों तक पहुंचाना है।
इस्तीफे के बाद की स्थिति
इस्तीफा देने के बाद घंटों रोके जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा विचार किया जाना स्वाभाविक है। उस समय कई बातें हुईं, लेकिन अब वह अध्याय पीछे छूट चुका है।
शंकराचार्य से मुलाकात पर क्या बोले
शंकराचार्य से बातचीत को लेकर अलंकार ने बताया कि मौनव्रत के कारण कोई औपचारिक संवाद नहीं हो सका। दोनों ने एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराकर अभिवादन किया और उन्होंने शंकराचार्य का आशीर्वाद लिया।
उन्होंने यह भी कहा कि शंकराचार्य के शिष्यों के साथ हुई कथित बदसलूकी और चोटी खींचे जाने की घटना से वे आहत हुए थे। उनके अनुसार चोटी सनातन धर्म का प्रतीक है और यह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर का विषय है।
आंदोलन की चेतावनी
अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि इस मुद्दे को देशभर में मजबूती से उठाया जाएगा। प्रेस रिलीज जारी की जाएगी और 6 फरवरी तक सरकार को अल्टीमेटम दिया जाएगा। उनका कहना है कि यदि एससी-एसटी एक्ट को वापस नहीं लिया गया तो देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
चुनाव लड़ने से किया इनकार
चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने साफ कहा कि उनका उद्देश्य चुनाव नहीं, बल्कि देश को सही दिशा में ले जाना है। उन्होंने दोहराया कि उनका इस्तीफा अंतिम है और वे अपने फैसले पर अडिग हैं।
26 जनवरी को दिया था इस्तीफा
गौरतलब है कि अलंकार अग्निहोत्री ने 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के दिन अपने पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने इसके पीछे यूजीसी के नए नियम और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ हुई कथित मारपीट को कारण बताया था। हालांकि शासन ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया और उन्हें निलंबित करते हुए मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।
इस्तीफे के बाद उन्होंने अपना सरकारी आवास भी खाली कर दिया था और आगे की रणनीति तय करने की बात कही थी।










