सहारनपुर के कुख्यात विभव राणा गिरोह पर जब वर्ष 2021 में नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) का शिकंजा कसना शुरू हुआ, तो तस्करों ने अपना नेटवर्क बचाने और फैलाने के नए तरीके खोजे। इसी दौरान शुभम नाम के युवक ने 2022 में अपने पिता के नाम पर ‘शैली ट्रेडर्स’ नामक फर्म बनाई और देखते ही देखते नशीले कफ सिरप की तस्करी के अवैध कारोबार का बड़ा चेहरा बन गया।
जीआर ट्रेडिंग पर सवाल उठे तो बनाई नई फर्म
विभव राणा की जीआर ट्रेडिंग जब जांच के दायरे में आई, तो शुभम ने मौके का फायदा उठाकर अपनी फर्म को एबाट हेल्थ केयर लिमिटेड जैसी बड़ी कंपनी से मुख्य वितरक (डिस्ट्रीब्यूटर) का दर्जा दिला दिया। इसके बाद उसने तस्करी को एक नए मॉडल पर विस्तार देना शुरू किया।
रांची में गोदाम बनाकर बदल दिया रास्ता
पश्चिम बंगाल होते हुए बांग्लादेश में तस्करी के दौरान आने वाली दिक्कतों से बचने के लिए शुभम ने रांची में एक गोदाम तैयार कराया। यहां से उसने दिखावटी तरीके से पूर्वांचल की कई फर्मों को आपूर्ति दिखाना शुरू किया। कई जगह नए नामों पर फर्जी फर्में बनाई गईं तो कहीं बिना सामान दिए 2 से 4 प्रतिशत कमीशन का लालच देकर बिलिंग कराई गई। गाजियाबाद, मेरठ, प्रयागराज जैसे बड़े जिलों में उसका नेटवर्क तेजी से फैल गया और वह सिर्फ छह महीनों में नशीले सिरप तस्करी का नया सरगना बनकर उभरा।
गाजियाबाद बना नया हब, आसिफ-वसीम थे संचालक
पहले यह नेटवर्क सहारनपुर में सक्रिय था, लेकिन 2021 में एसटीएफ वाराणसी और एनसीबी की कार्रवाइयों के बाद तस्करों ने गाजियाबाद को नया भंडारण केंद्र बना लिया। गाजियाबाद में नेटवर्क को संभालने की जिम्मेदारी आसिफ और वसीम को दी गई, जबकि पूर्वांचल का पूरा संचालन शुभम को सौंपा गया। बाद में आसिफ दुबई चला गया और शुभम को यूपी, असम, झारखंड, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों का प्रमुख बना दिया गया।
174 रुपये की सिरप भारत में 300 और विदेश में 600 तक
सूत्रों के मुताबिक, कंपनी से बल्क में करीब 174 रुपये की मिलने वाली नशीली सिरप भारत में 300 रुपये में और नेपाल-बांग्लादेश में 500 से 600 रुपये में बेची जा रही थी। ज्यादा कमाई के लिए पूर्वांचल के लगभग हर जिले में नए नामों से फर्में खड़ी कर दी गईं। कई जगह बोर्ड-बैनर जानबूझकर ऐसी जगह लगाए गए जहाँ कोई ध्यान न दे। जिन फर्मों के लाइसेंस पहले ही निरस्त हो चुके थे, उनके नाम पर भी बिल जारी किए गए।
लाइसेंस पर रोक नहीं, जांच की अनदेखी
2021 में बड़े नेटवर्क के खुलासे के बाद भी नई फर्मों को दिए जा रहे लाइसेंस और उनके उपयोग की जांच नहीं की गई। यहां तक कि यह रिपोर्ट भी चर्चा में रही कि अधिकारियों ने सब कुछ ठीक बताते हुए ऊपरी स्तर पर रिपोर्ट भेज दी।
सोनभद्र में एसआईटी ने पकड़ी दो फर्जी फर्में
सोनभद्र जिले में दो फर्जी फर्में तब पकड़ी गईं जब एसआईटी ने इनके आपूर्ति बिल, खरीद और वितरण पर सवाल उठाए। इससे साफ हो गया कि तस्करों ने प्रशासनिक खामियों और कमजोर निगरानी का फायदा उठाकर पूरा नेटवर्क तैयार कर लिया था।
यह पूरा मामला बताता है कि कैसे पुराने गिरोहों के कमजोर होने के बाद तस्कर नए नाम, नए रास्ते और नए राज्य चुनकर अपना अवैध कारोबार फैलाते रहे—और सिस्टम की लापरवाही से यह नेटवर्क और मजबूत होता गया।










