वाराणसी। उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने काशी में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि शंकराचार्य का स्थान सर्वोपरि है। उन्होंने कहा, “वे भगवान शंकराचार्य हैं। वे जहां भी जाएंगे, हम उनका स्वागत करेंगे। एक रामभक्त होने के नाते मैं स्वयं उनका अभिनंदन करने को तैयार हूं।”
हालांकि, प्रयागराज माघ मेले के बाद से शंकराचार्य और मुख्यमंत्री के बीच बयानबाजी तेज रही है। इस बीच केशव मौर्य लगातार शंकराचार्य के पक्ष में अपनी राय रखते रहे हैं।
1. “यूपी में गाय माता हैं”
गोहत्या के आरोपों और शंकराचार्य की ओर से उठाए गए सवालों पर डिप्टी सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून का राज है और गौ माता के प्रति सरकार की गहरी आस्था है।
उन्होंने कहा, “गो हत्यारों को पता है कि उत्तर प्रदेश में गाय माता हैं। उनकी रक्षा करना हम सबकी जिम्मेदारी है। गौ माता सबको दूध देती हैं और उनका सम्मान सर्वोपरि है। हम मानते हैं कि गौ माता में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास है। उन्हें अलग से दर्जा देने की जरूरत नहीं है।”
गौरतलब है कि शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री को खुद को ‘सच्चा हिंदू’ साबित करने के लिए 40 दिन का समय देते हुए प्रदेश में सभी स्लॉटर हाउस बंद करने और गाय को ‘राज्य माता’ का दर्जा देने की मांग की थी।
2. सपा पर तीखा हमला
डिप्टी सीएम ने अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, “अखिलेश यादव ढोंगी व्यक्ति हैं। उनकी सरकार में रामभक्तों, शिवभक्तों और गौभक्तों का दमन हुआ, जबकि गौ तस्करों को संरक्षण मिला। समाजवादी पार्टी ने हमेशा मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति की है।”
अखिलेश द्वारा शंकराचार्य को समर्थन दिए जाने पर मौर्य ने पलटवार करते हुए कहा कि यह केवल राजनीतिक ढोंग है। उन्होंने कहा कि सपा और कांग्रेस भारतीय संस्कृति को मानने वाले मतदाताओं को भ्रमित करने की कोशिश कर रही हैं।
3. 2047 तक भाजपा सरकार का दावा
आगामी चुनावों और भाजपा के भविष्य को लेकर केशव मौर्य ने बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि विकास और सुशासन के दम पर 2047 तक भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी रहेगी।
उनका कहना था कि विपक्षी गठबंधन भाजपा को डिगा नहीं पाएगा और आने वाले समय में इसके परिणाम स्पष्ट दिखेंगे।
क्या है पूरा विवाद?
प्रयागराज में 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन माघ मेले के दौरान शंकराचार्य और प्रशासन के बीच विवाद सामने आया था। इसके बाद 24 जनवरी को जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष महाराज ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत की, जिसमें माघ मेला-2026 और महाकुंभ-2025 के दौरान बच्चों से यौन शोषण के आरोप लगाए गए।
कार्रवाई न होने का आरोप लगाते हुए 8 फरवरी को स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। 13 फरवरी को दो बच्चों को कोर्ट में पेश किया गया और 21 फरवरी को उनके बयान दर्ज हुए। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज की गई।
फिलहाल, यह मामला राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।










