Gold Price : वैश्विक टैरिफ नीतियों और बदलते आर्थिक माहौल का असर कीमती धातुओं के बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। हाल के दिनों में सोना और चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सुबह के सत्र में दाम बढ़ते हैं, लेकिन दिन के अंत तक इनमें मामूली गिरावट दर्ज होती है। इसके बावजूद 24 कैरेट सोना 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से ऊपर बना हुआ है, जबकि चांदी भी 1 लाख रुपये प्रति किलो पार कर चुकी है, जिससे खासकर महिलाओं और खरीदारों में चिंता बढ़ी है।
8 अगस्त का भाव
इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के मुताबिक, 8 अगस्त को 24 कैरेट सोना 1,00,942 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 1,14,732 रुपये प्रति किलो रही। बाजार शनिवार और रविवार को बंद रहने से कीमतें स्थिर रहीं। उस दिन 995 प्योरिटी सोना 1,00,538 रुपये, 916 प्योरिटी 92,463 रुपये और 750 प्योरिटी 75,707 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा था।
आज का भाव (11 अगस्त 2025)
दिल्ली में 24 कैरेट सोना 1,03,460 रुपये और 22 कैरेट सोना 94,850 रुपये प्रति 10 ग्राम पर स्थिर कारोबार कर रहा है। पिछले दिन की तुलना में इन दरों में कोई बदलाव नहीं है। फिलहाल बाजार में बड़े उतार-चढ़ाव की कमी के चलते खरीदारों के लिए यह संतुलित खरीद का समय माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में करेंसी मूवमेंट, ब्याज दर घोषणाएं और व्यापार टैरिफ पर नजर रखना समझदारी होगी।
कीमत तय होने के कारक
सोना और चांदी की दरें मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्पॉट प्राइस, डॉलर-रुपया विनिमय दर, आयात शुल्क, कर, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, भारत की सांस्कृतिक मांग और मुद्रास्फीति पर निर्भर करती हैं। लंदन बुलियन मार्केट और COMEX जैसे अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंज इन धातुओं की कीमत ट्रॉय औंस (करीब 31.1 ग्राम) के हिसाब से डॉलर में तय करते हैं। चूंकि भारत में अधिकतर सोना-चांदी आयात होती है, डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने पर कीमतें स्वतः बढ़ जाती हैं।
इसके अलावा, आयात पर सीमा शुल्क, कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर विकास उपकर (AIDC) और GST भी कीमत में जुड़ते हैं। वैश्विक युद्ध, आर्थिक मंदी, ब्याज दरों में बदलाव और बैंकिंग संकट जैसी परिस्थितियों में सोना “सेफ हेवन” निवेश बन जाता है, जिससे इसकी मांग बढ़ जाती है। भारत में यह न केवल निवेश बल्कि शादी, त्योहार और धार्मिक अवसरों पर शुभ माना जाने के कारण सालभर खरीदा जाता है। महंगाई के समय लोग सोने को मूल्य सुरक्षित रखने का साधन मानते हैं, जो लंबे समय तक भरोसेमंद साबित होता है।










