लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर एक बार फिर तीखा तंज कसा है। लखनऊ में आयोजित अटल स्वास्थ्य मेले के दौरान मंच से बोलते हुए केशव मौर्य ने कहा कि बिहार चुनाव में हार के बाद अखिलेश यादव की मानसिक स्थिति ठीक नहीं लग रही है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि राजनाथ सिंह के बेटे नीरज सिंह से कहूंगा कि अखिलेश को यहां बुलवाकर इलाज करवा दें।
डिप्टी सीएम ने पुराने किस्से का जिक्र करते हुए कहा कि अयोध्या सीट जीतने के बाद अखिलेश यादव लगातार कहते थे कि अवध में हराया है तो मगध में भी हराएंगे। उन्होंने बताया कि बिहार चुनाव के दौरान पटना एयरपोर्ट पर उनकी अखिलेश यादव से मुलाकात हुई थी, जहां अखिलेश ने उनसे लड्डू खिलाने की बात कही थी। इस पर केशव मौर्य ने जवाब दिया था कि 14 तारीख आने दीजिए, नीतीश कुमार की सरकार बनने पर लड्डू खिलाएंगे। इसके बाद से अखिलेश यादव का कोई अता-पता नहीं है।
अटल स्वास्थ्य मेले में जरूरतमंदों को बांटने के निर्देश
कार्यक्रम के दौरान केशव मौर्य ने मंच से ही जिलाधिकारी को फोन कर अटल स्वास्थ्य मेले में आए जरूरतमंद लोगों को कंबल बांटने के निर्देश दिए। विकास नगर स्थित मिनी स्टेडियम में शुरू हुआ यह अटल स्वास्थ्य मेला दो दिन तक चलेगा, जहां लोगों को मुफ्त इलाज की सुविधा दी जा रही है।
केशव और अखिलेश की सियासी तकरार पुरानी
केशव मौर्य और अखिलेश यादव के बीच राजनीतिक बयानबाजी कोई नई बात नहीं है। विधानसभा से लेकर सार्वजनिक मंचों तक दोनों नेता अक्सर एक-दूसरे पर हमलावर रहते हैं। दोनों ही ओबीसी वर्ग से आते हैं और कई मौकों पर सदन के भीतर तीखी नोकझोंक भी हो चुकी है।
25 मई 2025 को विधानसभा में अखिलेश यादव ने केशव मौर्य पर तंज कसते हुए कहा था कि जनता ने उन्हें हराकर उनकी गर्मी निकाल दी है। इस पर केशव मौर्य ने पलटवार करते हुए अखिलेश के 400 सीटों के दावे पर सवाल खड़े किए थे। जवाबी बयानबाजी इतनी बढ़ गई थी कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सदन में हस्तक्षेप कर सभी नेताओं को मर्यादा में रहने की नसीहत देनी पड़ी थी।
क्यों अखिलेश के निशाने पर रहते हैं केशव मौर्य
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी आम है कि अखिलेश यादव, केशव मौर्य को लेकर ज्यादा हमलावर रहते हैं। इसकी एक वजह दोनों का पिछड़े वर्ग से होना माना जाता है। अखिलेश यादव पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के जरिए सत्ता में वापसी की रणनीति पर काम कर रहे हैं, जिसमें केशव मौर्य को भी एक अहम चेहरा माना जाता है। इसी राजनीतिक समीकरण के चलते दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती रहती है।










