Banaras Hindu University के ट्रॉमा सेंटर प्रभारी प्रो. Saurabh Singh को भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के मामले में Lokayukta Uttar Pradesh ने समन जारी किया है।
लोकायुक्त ने प्रो. सौरभ सिंह को आगामी 4 जून 2026 को सभी संबंधित दस्तावेजों और अभिलेखों के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया है। उनके खिलाफ आयुष्मान भारत योजना के तहत मिली करीब 11.61 करोड़ रुपये की धनराशि के उपयोग में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता ने की शिकायत
यह शिकायत सामाजिक कार्यकर्ता Rajnarayan Maurya द्वारा लोकायुक्त के समक्ष दायर परिवाद के आधार पर दर्ज की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ट्रॉमा सेंटर में आयुष्मान भारत योजना की धनराशि का दुरुपयोग किया गया और कई मामलों में नियमों की अनदेखी कर भुगतान किए गए।
परिवादी ने प्रो. सौरभ सिंह की कथित बेनामी संपत्तियों, बैंक लेन-देन, खरीद प्रक्रियाओं और अधिकृत पोर्टल रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच की मांग भी की है।
निजी फर्मों से खरीद पर सवाल
आरोप है कि सरकारी व्यवस्था के तहत संचालित “अमृत फार्मेसी” से लगभग 1.31 करोड़ रुपये की खरीद दिखाई गई, जबकि 10 करोड़ रुपये से अधिक की खरीद निजी फर्मों से की गई।
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि कई दवाइयों और उपकरणों का भुगतान आयुष्मान योजना से किया गया, जबकि वे स्वीकृत सूची में शामिल नहीं थे। कुछ मामलों में गलत एंट्री कर भुगतान प्राप्त करने का भी आरोप लगाया गया है।
एसएसीएचआईएस नियमों के उल्लंघन का आरोप
परिवाद में कहा गया है कि आयुष्मान भारत योजना के डिजिटल प्लेटफॉर्म SACHIS के नियमों की अनदेखी की गई।
नियमानुसार मरीज के इलाज से पहले अधिकृत स्वीकृति लेना जरूरी होता है, लेकिन आरोप है कि कई मामलों में बिना अनुमति प्रक्रिया पूरी कर भुगतान लिया गया।
आयकर विभाग भी कर रहा जांच
शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त को बताया है कि प्रो. सौरभ सिंह की कथित बेनामी संपत्तियों की जांच Income Tax Department भी कर रहा है।
बताया गया कि उनकी संपत्तियों और बैंक ट्रांजैक्शन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
दो अन्य अधिकारियों को भी बुलावा
लोकायुक्त ने इस मामले में दो अन्य अधिकारियों को भी तलब किया है। इनमें आयुष्मान भारत योजना की मुख्य कार्याधिकारी Archana Verma और ट्रॉमा सेंटर में तैनात नोडल अधिकारी Kavita Meena शामिल हैं।
दोनों अधिकारियों को भी 4 जून 2026 को संबंधित दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।
विधि विशेषज्ञ ने बताया गंभीर मामला
विधि विशेषज्ञ एडवोकेट Amit Srivastava ने कहा कि लोकायुक्त आमतौर पर तभी इस स्तर का संज्ञान लेता है जब उसे प्रथम दृष्टया आरोपों और साक्ष्यों में गंभीरता दिखाई देती है।
उनके अनुसार यह मामला अब औपचारिक प्रारंभिक जांच के चरण में पहुंच चुका है और आगे चलकर एफआईआर दर्ज होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।










