वर्ष 2026 का अहम पूर्ण चंद्र ग्रहण मंगलवार को भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में दिखाई देगा। यह खगोलीय घटना भारतीय समयानुसार दोपहर 3:20 बजे शुरू होकर शाम 6:48 बजे तक चलेगी। ग्रहण की पूर्ण अवस्था 4:34 बजे से 5:33 बजे के बीच रहेगी, जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में आ जाएगा।
क्यों खास है यह पूर्ण चंद्र ग्रहण?
पूर्ण चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया सीधे चंद्रमा पर पड़ती है। यह घटना केवल पूर्णिमा के दिन ही संभव होती है, जब तीनों खगोलीय पिंड लगभग एक सीध में होते हैं।
जब चंद्रमा पृथ्वी की गहरी छाया यानी ‘उम्ब्रा’ में प्रवेश करता है, तो उसका रंग लालिमा लिए दिखाई देता है। इसी वजह से इसे आम भाषा में ‘ब्लड मून’ भी कहा जाता है।
चंद्रमा लाल क्यों दिखता है?
ग्रहण के दौरान चंद्रमा का लाल या नारंगी दिखाई देना एक वैज्ञानिक प्रक्रिया का परिणाम है। जब सूर्य का प्रकाश पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरता है, तो नीली रोशनी अधिक बिखर जाती है, जबकि लाल और नारंगी रंग की किरणें कम बिखरती हैं। यही लाल प्रकाश मुड़कर चंद्रमा तक पहुंचता है और उसे रक्तिम आभा प्रदान करता है। यही कारण है कि सूर्योदय और सूर्यास्त के समय भी आकाश लाल या नारंगी रंग का दिखाई देता है।
भारत में कहां दिखेगा ग्रहण?
भारत के अधिकांश हिस्सों में यह पूर्ण चंद्र ग्रहण दिखाई देगा, हालांकि कई स्थानों पर लोग इसका अंतिम चरण ही देख पाएंगे, क्योंकि चंद्रमा उसी समय उदित होगा।
पूर्वोत्तर भारत और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में चंद्रमा अपेक्षाकृत पहले दिखाई देगा, जिससे वहां पूर्ण अवस्था की अंतिम झलक देखने का अवसर मिलेगा। दक्षिण भारत के शहरों जैसे चेन्नई और कन्याकुमारी में यह दृश्य लगभग 30 मिनट तक स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा।
दुनिया के किन हिस्सों में दिखेगा ‘ब्लड मून’?
अनुमान है कि विश्व की करीब 40 प्रतिशत आबादी इस पूर्ण चंद्र ग्रहण का कम से कम एक चरण देख सकेगी। यह एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका और यूरोप के कुछ हिस्सों में अलग-अलग समय पर नजर आएगा।
खगोल विज्ञान के शौकीनों और शोधकर्ताओं के लिए यह एक खास अवसर माना जा रहा है, क्योंकि ऐसा पूर्ण चंद्र ग्रहण अब 2028 के बाद ही देखने को मिलेगा।










