ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव में हार के बाद साफ कहा है कि वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगीं। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि क्या कोई मुख्यमंत्री हार के बाद भी पद पर बना रह सकता है?
संवैधानिक रूप से जवाब सीधा है, नहीं। जनादेश के बाद सरकार बदलनी ही होती है।
क्या कहता है संविधान?
भारत में राज्य सरकार का संचालन अनुच्छेद 164 के तहत होता है। इसके अनुसार मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं और वही उन्हें पद पर बनाए रखने या हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं।
अगर कोई मुख्यमंत्री इस्तीफा देने से इनकार करता है, तो:
- राज्यपाल उनसे इस्तीफा मांग सकते हैं
- बहुमत खोने की स्थिति में उन्हें पद छोड़ना होता है
- इनकार करने पर राज्यपाल उन्हें बर्खास्त कर सकते हैं
राज्यपाल की क्या होती है भूमिका?
राज्यपाल के पास ऐसी स्थिति में महत्वपूर्ण अधिकार होते हैं:
- नई सरकार बनाने के लिए बहुमत दल के नेता को बुलाना
- मुख्यमंत्री को पद से हटाना (यदि बहुमत न हो)
- गंभीर संवैधानिक संकट की स्थिति में अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करना
नई सरकार कैसे बनेगी?
चुनाव परिणाम आने के बाद:
- जिस दल या गठबंधन के पास बहुमत होता है, उसका नेता चुना जाता है
- राज्यपाल उसे मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाते हैं
- पुरानी सरकार स्वतः समाप्त मानी जाती है
इसलिए, भले ही ममता बनर्जी इस्तीफा न दें, लेकिन बहुमत खोने के बाद वह संवैधानिक रूप से मुख्यमंत्री नहीं रह सकतीं।
ममता बनर्जी ने क्या कहा?
हार के बाद ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव में गड़बड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई बीजेपी से नहीं बल्कि चुनाव आयोग से थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि वह हारी नहीं हैं, इसलिए इस्तीफा नहीं देंगीं।










