सनातन परंपरा में ग्रीष्म ऋतु के विशेष नौ दिवसीय काल “नौतपा” की शुरुआत हो गई है। भीषण गर्मी और तेज धूप के बीच काशी में बाबा Shri Kashi Vishwanath Temple के दरबार में विशेष पूजा-अर्चना और अभिषेक का आयोजन किया गया।
नौतपा के पहले दिन भगवान श्री विश्वेश्वर का फलों के रस से शीतल अभिषेक किया गया। मंदिर में आम, बेल, तरबूज और अन्य फलों के रस से बाबा का अभिषेक कर विश्व कल्याण और जनसुख की कामना की गई। इस दौरान मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा।
मान्यता है कि नौतपा के दौरान सूर्य की तपिश सबसे अधिक होती है। ऐसे में भगवान शिव को शीतल पदार्थ अर्पित करने से भक्तों को मानसिक शांति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसी परंपरा के तहत काशी में विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए।
मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। भक्तों ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छी वर्षा की कामना की।
धर्माचार्यों के अनुसार नौतपा केवल मौसम परिवर्तन का संकेत नहीं है, बल्कि यह तप, संयम और साधना का भी विशेष काल माना जाता है। इस दौरान दान-पुण्य, जल सेवा और भगवान सूर्य व शिव की उपासना का विशेष महत्व बताया गया है।










