वाराणसी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने वाराणसी के प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। खरगे ने कहा कि सौंदर्यीकरण और व्यवसायीकरण के नाम पर काशी की सदियों पुरानी धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत को बुलडोजर से नष्ट किया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री इतिहास की धरोहरों को मिटाकर सिर्फ अपनी “नेम-प्लेट” लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
“आध्यात्मिक विरासत को ध्वस्त किया जा रहा” : खरगे
15 जनवरी 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने लिखा कि भोंडे सौंदर्यीकरण और व्यवसायीकरण के नाम पर मणिकर्णिका घाट में बुलडोजर चलवाकर सदियों पुरानी धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को नुकसान पहुंचाया गया है। उन्होंने कहा कि पहले कॉरिडोर के नाम पर छोटे-बड़े मंदिर और देवालय तोड़े गए और अब प्राचीन घाटों की बारी आ गई है।
खरगे ने अपने पोस्ट के साथ कुछ तस्वीरें और वीडियो भी साझा किए, जिनमें बुलडोजर और क्षतिग्रस्त मूर्तियां दिखाई दे रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि सदियों पुरानी मूर्तियों और मंदिरों को क्यों तोड़ा गया और उन्हें संग्रहालय में सुरक्षित क्यों नहीं रखा गया। साथ ही यह भी पूछा कि काशी मोक्ष की कामना लेकर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के साथ क्या धोखा किया जा रहा है।
मणिकर्णिका घाट का महत्व और पुनर्विकास योजना
मणिकर्णिका घाट हिंदू धर्म में सबसे पवित्र श्मशान घाट माना जाता है, जहां अंतिम संस्कार से मोक्ष मिलने की मान्यता है। यह वाराणसी के सबसे प्राचीन घाटों में से एक है, जिसका संबंध माता सती के कर्णफूल की कथा से जुड़ा है।
घाट के पुनर्विकास प्रोजेक्ट की आधारशिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 जुलाई 2023 को रखी थी। यह काशी विश्वनाथ कॉरिडोर परियोजना का हिस्सा है। परियोजना के तहत घाट को चौड़ा करने, तीर्थयात्रियों के लिए रैंप और बैठने की व्यवस्था, वीआईपी सीटिंग, लकड़ी बिक्री के लिए वुड प्लाजा, बेहतर साफ-सफाई, बाढ़ से सुरक्षा और स्किंदिया घाट तक कनेक्टिविटी बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस परियोजना की लागत लगभग 17.56 करोड़ रुपये है और इसे 2026 तक पूरा करने की योजना है। इसमें पर्यावरण के अनुकूल तकनीक से लकड़ी की खपत और प्रदूषण कम करने पर भी जोर दिया गया है।
विवाद की वजह क्या है?
पुनर्विकास कार्य को लेकर स्थानीय लोगों और विपक्षी दलों का आरोप है कि निर्माण के दौरान सदियों पुरानी मूर्तियां और छोटे-बड़े मंदिर क्षतिग्रस्त हुए हैं। वहीं, जिला प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि कोई भी मंदिर या सांस्कृतिक संरचना नष्ट नहीं की जा रही है और सभी धरोहरें सुरक्षित हैं, जिन्हें बाद में बहाल किया जाएगा। वाराणसी के जिलाधिकारी ने सोशल मीडिया पर भ्रामक और गलत जानकारी फैलाने को लेकर चेतावनी भी जारी की है।










