BHU के केंद्रीय कार्यालय गेट पर इतिहास विभाग के शोध छात्रों का धरना, आरक्षण नियमों के उल्लंघन का आरोप

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय के केंद्रीय कार्यालय के मुख्य द्वार पर सोमवार को इतिहास विभाग के शोध छात्रों ने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि प्रवेश के समय उनसे फीस मुख्य कैंपस में जमा कराई गई, लेकिन अब उन्हें अलग-अलग संबद्ध कॉलेजों में भेजा जा रहा है। छात्रों का कहना है कि इस प्रक्रिया में आरक्षण नियमों का भी पालन नहीं किया गया, जो समानता और बराबरी के अधिकार के खिलाफ है।

दस महीने से भटकने का आरोप

धरने पर बैठे छात्रों ने बताया कि वे पिछले करीब दस महीनों से विश्वविद्यालय के अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। इस दौरान न तो उनकी समस्या का समाधान हुआ और न ही उन्हें कोई स्पष्ट जवाब मिला। छात्रों का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया ने उन्हें मानसिक रूप से परेशान कर दिया है और यह उनके साथ मानसिक शोषण के समान है।

विभागाध्यक्ष और डीआरसी पर गंभीर आरोप

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि विभागाध्यक्ष और डीआरसी (डिपार्टमेंटल रिसर्च कमेटी) की मिलीभगत से जानबूझकर उन्हें मुख्य परिसर से दूर किया जा रहा है। छात्रों के अनुसार, यह कदम न केवल नियमों के खिलाफ है बल्कि आरक्षित वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव को भी दर्शाता है।

सभी प्रदर्शनकारी छात्र आरक्षित वर्ग से धरना दे रहे सभी शोध छात्र आरक्षित वर्ग से हैं। इनमें

  • एससी वर्ग: राहुल कुमार, नेहा मंडल, धर्मेंद्र कुमार डाहायत, नीसी

  • ओबीसी वर्ग: सुजीत यादव, चांदनी यादव, सोनाली नरवरे, दीपशिखा गुप्ता, सीवाजा (केरल), अभिषेक कुमार

  • एसटी वर्ग: मीशांत राज, शिवम वर्मा

छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि उन्हें मुख्य कैंपस में ही शोध कार्य की अनुमति दी जाए और आरक्षण नियमों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाए। धरना स्थल पर छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

News Rastra
Author: News Rastra

Leave a Comment

और पढ़ें